SHO की विदाई पर रोने लगे लोग, बोले- प्लीज मत जाइए सर

Edited By Updated: 15 May, 2025 12:51 PM

people started crying at the sho farewell

दिल्ली के सब्जी मंडी थाने के SHO इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा की विदाई ने सभी को चौंका दिया। यह दृश्य किसी बड़े नेता की विदाई जैसा लग रहा था, जहां लोग सड़कों पर माला पहनाने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन जब यह पता चला कि यह सम्मान किसी नेता के लिए...

नेशनल डेस्क. दिल्ली के सब्जी मंडी थाने के SHO इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा की विदाई ने सभी को चौंका दिया। यह दृश्य किसी बड़े नेता की विदाई जैसा लग रहा था, जहां लोग सड़कों पर माला पहनाने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन जब यह पता चला कि यह सम्मान किसी नेता के लिए नहीं, बल्कि एक पुलिस अधिकारी के लिए है, तो लोग थोड़े हैरान रह गए। दरअसल, राम मनोहर मिश्रा का कार्यकाल थाने में इतना अच्छा और प्रभावशाली था कि जब उनका ट्रांसफर हुआ, तो इलाके के लोग भावुक हो गए और उन्हें विदाई देने के लिए सड़कों पर उतर आए।

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लोगों से जुड़ाव और सम्मान

आम धारणा यह है कि पुलिस अधिकारियों से आम आदमी की दूरी बनी रहती है। लेकिन इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने न केवल थाने के दरवाजों को हमेशा के लिए खोला, बल्कि आम लोगों को भी थाने में अपनी शिकायतों के साथ बिना किसी डर के पहुंचने का भरोसा दिलाया। वे अपने कार्यकाल में न केवल एक सख्त अधिकारी थे, बल्कि एक ऐसे इंसान भी थे, जिनकी पहुंच और समझ से लोग खुद को जुड़े हुए महसूस करते थे।

अपने दो वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने इलाके के लोगों के साथ ऐसा विश्वास और संबंध स्थापित किया कि जब उनका ट्रांसफर हुआ, तो उनका विदाई समारोह किसी सामान्य विदाई से कहीं बढ़कर था। यह एक भावनात्मक पल था, जो लोगों के दिलों की गहरी आवाज को दर्शाता था।

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विदाई का अनोखा दृश्य

इंस्पेक्टर मिश्रा की विदाई के वक्त का दृश्य वास्तव में अनोखा था। पूरे इलाके के लोग, चाहे वे बुजुर्ग हों, युवा हों या महिलाएं, सभी ने उन्हें गले लगाकर भावुकता के साथ विदाई दी। यह एक प्रकार का 'जहांगीरी दरबार' था, जो उन्होंने अपने कार्यकाल में सब्जी मंडी थाने में स्थापित किया था। इस दरबार में वे सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि हर वर्ग और धर्म के व्यक्ति के लिए अपने जैसे हो गए थे। उन्होंने सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी भाग लिया, जिससे वे क्षेत्र के अभिन्न हिस्सा बन गए थे।

एक पुलिस अधिकारी की सच्ची पहचान

यह कहानी हमें यह बताती है कि देश की सीमा पर जहां वीर सैनिक शौर्य गाथाएं लिखते हैं। वहीं देश के भीतर पुलिस बल भी समाज की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा जैसे अधिकारी उस व्यवस्था का उदाहरण हैं, जो लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं और यह साबित करते हैं कि वर्दी केवल डर का नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व का प्रतीक भी हो सकती है।

दिल्ली पुलिस के इतिहास में शायद ही किसी SHO की विदाई इतनी भावनात्मक रही हो और यह दर्शाता है कि एक पुलिस अधिकारी अपनी मेहनत, समझ और इंसानियत से लोगों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ सकता है।

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