Edited By Deepender Thakur,Updated: 19 Sep, 2022 10:27 PM

कोविड -19 ने शिक्षा मुहैया करने के हमारे सारे नियमित तरीकों को हिलाकर रख दिया है और शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को नयी चुनौतियों से घेर दिया। हालांकि इसने नई संभावनाओं को खोल दिया
नई दिल्ली। कोविड -19 ने शिक्षा मुहैया करने के हमारे सारे नियमित तरीकों को हिलाकर रख दिया है और शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को नयी चुनौतियों से घेर दिया। हालांकि इसने नई संभावनाओं को खोल दिया और साथ ही साथ शिक्षा जगत में फैली गहरी असमानताओं को भी उजागर किया। जिसके बाद अब "सामान्य स्थिति में वापस आने" का समय आ गया है लेकिन उससे पहले ये जानना जरुरी है कि आज के दौर में "सामान्य" क्या है?
इस विषय को लेकर एसआर ग्रुप, लखनऊ के वाइस चेयरमैन पीयूष सिंह चौहान ने अपने दृष्टिकोण को तत्काल और दीर्घकालिक रूप में दोनों तरह से साझा किया है जिससे हम शिक्षण प्रक्रिया को फ्यूचर प्रूफ कर सकेंगे और निकट भविष्य में नए अवसरों और रोजगार की मांगों को एक साथ बेहतर रूप से समझ सकेंगे।
पीयूष सिंह चौहान कहते हैं कि, "बेहतर शैक्षिक भविष्य की कल्पना करना प्रेरणादायक और आशावादी हो सकता है, लेकिन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को वास्तव में फ्यूचर प्रूफ शिक्षा की आवश्यकता है। यह शब्द प्रमुख संज्ञानात्मक विज्ञान विशेषज्ञ पॉल ए किर्श्नर द्वारा गढ़ा गया था जो "21वीं सदी के कौशल" के महत्व पर प्रकश डालता है। अनिश्चितता के बीच आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका सरल है "21 वीं सदी के कौशल" को अलग रखें और तेजी से बदलती दुनिया में एक स्थिर और स्थायी तरीके से सीखना जारी रखने के साथ जीवन में आवयशक मूल्य, ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण को पुख्ता किया जाए"
पीयूष सिंह चौहान आगे जोड़ते हुए कहते हैं कि, "दुनिया बदल रही है और हमारी शिक्षण पद्धतियां भी बदल रही हैं। हमारा नैतिक दायित्व इस पीढ़ी को राइट कंटेंट और क्षमताओं से लैस करना है जिसकी उन्हें अप्रत्याशित भविष्य को संभालने और कामयाब होने में मदद मिलेगी। ऐसा करना हमारा सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक उपलब्धियों में से एक होगा।"
पीयूष सिंह चौहान, जो एसआर ग्रुप के वाइस चेयरमैन हैं और बड़े पैमाने पर स्कूल और कॉलेज चलाते हैं, वह फ्यूचर प्रूफ शिक्षा के लिए तीन सूचक दृष्टिकोण के साथ मार्गदर्शन करते हुए कहते हैं कि "पहले हमें गहरे नैतिक मूल्यों को स्थापित करके बिल्डिंग ब्लॉक्स रखना होगा। वे जड़ों की तरह कार्य करते हैं। यदि कोई बच्चा नैतिक रूप से सुसज्जित है, तो वह काबिलियत के साथ किसी भी अनिश्चितता का सामना कर सकता है। दूसरा, बच्चों को उच्च-क्रम की सोच और कार्य कौशल विकसित करने में मदद करें। तीसरा, बड़ी समस्याओं से निपटने में उनकी सहायता करें जिनके लिए मेटाकॉग्निटिव दक्षताओं और कौशल की आवश्यकता होती है।"