Edited By Parveen Kumar,Updated: 28 Jan, 2026 06:25 PM
सोना-चांदी की कीमतों में लगातार जारी तेजी ने निवेशकों से लेकर आम लोगों तक सभी को चौंका दिया है. हर दिन ये कीमती धातुएं नए रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं. सिर्फ इसी हफ्ते के तीन कारोबारी दिनों में जो उछाल देखने को मिला है, उसने बाजार की धड़कनें बढ़ा दी...
नेशनल डेस्क : सोना-चांदी की कीमतों में लगातार जारी तेजी ने निवेशकों से लेकर आम लोगों तक सभी को चौंका दिया है. हर दिन ये कीमती धातुएं नए रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं. सिर्फ इसी हफ्ते के तीन कारोबारी दिनों में जो उछाल देखने को मिला है, उसने बाजार की धड़कनें बढ़ा दी हैं। तीन दिनों में चांदी 48,000 रुपये से ज्यादा महंगी हो गई है, जबकि सोना 6,000 रुपये से अधिक उछल चुका है. सवाल ये है कि क्या यह तेजी अभी और आगे जाएगी या फिर किसी बड़े झटके का संकेत है?
बुधवार को भी नहीं थमी रफ्तार
एमसीएक्स पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी मंगलवार के बंद भाव 3,56,279 रुपये प्रति किलोग्राम से उछलकर बुधवार को 3,83,100 रुपये प्रति किलो के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। यानी सिर्फ एक दिन में ही 26,821 रुपये की तेजी। अगर पिछले तीन कारोबारी दिनों की बात करें, तो सोमवार के बंद भाव 3,34,699 रुपये से चांदी 48,401 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है।
सोना भी पीछे नहीं
तेजी की इस दौड़ में सोना भी किसी से कम नहीं रहा। 5 फरवरी एक्सपायरी वाला गोल्ड तीन कारोबारी दिनों में 6,876 रुपये महंगा होकर 1,66,073 रुपये से बढ़कर 1,72,949 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। खास बात ये है कि सिर्फ एक दिन में ही 24 कैरेट सोना 5,028 रुपये उछल गया।
ग्लोबल मार्केट में सिल्वर का गदर
चांदी की मौजूदा तेजी के पीछे वैश्विक बाजार का बड़ा रोल है। जनवरी 2025 में जहां ग्लोबल सिल्वर प्राइस करीब 30 डॉलर प्रति औंस थी, वहीं जनवरी 2026 तक यह बढ़कर 111 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। यानी महज 12 महीनों में 270% की उछाल। 2026 की शुरुआत में ही सिल्वर करीब 20% और महंगी हो चुकी है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और सेफ हेवेन की तलाश ने निवेशकों को चांदी की ओर तेजी से मोड़ा है।
क्यों बढ़ रही है चांदी की डिमांड?
एफपीए एडुटेक के को-फाउंडर और ट्रूवांटा वेल्थ के संस्थापक किर्तन शाह के मुताबिक, चांदी की कीमतों में उछाल के दो बड़े कारण हैं-
औद्योगिक मांग: AI, सेमीकंडक्टर, सोलर एनर्जी, बैटरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चांदी की जबरदस्त जरूरत बढ़ी है।
निवेश की भूख: Silver ETF में निवेश बढ़ने पर फंड हाउस बैकएंड में फिजिकल सिल्वर खरीदते हैं. बीते 90 दिनों में सिल्वर ETF की मांग दोगुनी हो चुकी है, जिससे कीमतों को और हवा मिली।
क्या चांदी में बन रहा है बुलबुला?
तेजी के बीच किर्तन शाह ने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इतिहास गवाह है- जब भी चांदी गिरती है, तो 80 से 90 फीसदी तक टूट सकती है। ऐसा दो बार पहले भी हो चुका है। शाह का साफ कहना है, “मैं अपने पास मौजूद चांदी रखूंगा, लेकिन मौजूदा कीमतों पर नई चांदी बिल्कुल नहीं खरीदूंगा।” उनके मुताबिक मौजूदा तेजी का बड़ा हिस्सा निवेश आधारित है, न कि वास्तविक औद्योगिक मांग। यही वजह है कि यह उछाल एक बड़े बुलबुले का रूप ले सकता है।
निवेशकों के लिए बड़ा सवाल
क्या चांदी की यह रफ्तार आगे भी जारी रहेगी, या फिर अचानक ब्रेक लगने वाला है? एक तरफ रिकॉर्ड कीमतें हैं, दूसरी तरफ इतिहास की चेतावनी। ऐसे में चांदी में निवेश करने से पहले जोश नहीं, होश से फैसला लेना बेहद जरूरी है।