Edited By Radhika,Updated: 17 Mar, 2026 11:53 AM

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बंदरों की शरारतें अब केवल स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि यह देश की राष्ट्रपति के आगामी दौरे के लिए सुरक्षा और व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित...
नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बंदरों की शरारतें अब केवल स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि यह देश की राष्ट्रपति के आगामी दौरे के लिए सुरक्षा और व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित तीन दिवसीय प्रवास को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग इन 'चतुर' बंदरों को नियंत्रित करने के लिए हाई-अलर्ट पर है।
श्रद्धालुओं के लिए 'डील' बन गए हैं बंदर
वृंदावन के बाजारों और मंदिरों के पास रहने वाले बंदरों ने एक अजीबोगरीब व्यवहार विकसित कर लिया है। वे मुख्य रूप से चश्मा पहनने वाले लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेना और फिर उसके बदले खाने-पीने की चीजें या 'फ्रूटी' जैसे पेय पदार्थों की मांग करना यहाँ की गलियों में एक आम सौदा बन चुका है। लेकिन राष्ट्रपति के वीवीआईपी दौरे के दौरान इस तरह की किसी भी घटना से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियां फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं।
सुरक्षा के लिए 'लंगूरों के कटआउट' का सहारा
वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कड़े होने के कारण अब बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों का उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन ने मनोवैज्ञानिक तकनीक अपनाई है। संवेदनशील इलाकों में लंगूरों के आदमकद कटआउट लगाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें देखकर बंदर दूर रहें।
वन विभाग की विशेष 'टास्क फोर्स' तैनात
राष्ट्रपति 19 मार्च से अपना दौरा शुरू करेंगी, जिसके तहत वे उड़िया बाबा आश्रम और रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल जैसे प्रमुख स्थानों पर जाएंगी। 21 मार्च को उनकी गोवर्धन परिक्रमा भी प्रस्तावित है। इस मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए वन विभाग की 30 सदस्यीय विशेष टीम तैनात की गई है। यह टीम लेजर लाइट, गुलेल और लाठी-डंडों जैसे पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों के जरिए बंदरों की गतिविधियों पर नजर रखेगी ताकि वीवीआईपी मूवमेंट में कोई खलल न पड़े।