Edited By Mansa Devi,Updated: 31 Jan, 2026 05:48 PM

केंद्रीय बजट 2026 से ठीक पहले सोने और चांदी के बाजार में हलचल तेज हो गई है। बीते कुछ हफ्तों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रही कीमती धातुओं की कीमतों पर 30 जनवरी को ब्रेक लगा है।
नेशनल डेस्क: केंद्रीय बजट 2026 से ठीक पहले सोने और चांदी के बाजार में हलचल तेज हो गई है। बीते कुछ हफ्तों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रही कीमती धातुओं की कीमतों पर 30 जनवरी को ब्रेक लगा है। MCX पर सोना 1,49,075 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि 29 जनवरी को चांदी करीब 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बजट के बाद सोने-चांदी के भाव गिरेंगे या फिर एक नई तेजी देखने को मिलेगी।
बजट के तुरंत बाद गिरावट के आसार
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट के तुरंत बाद सोने और चांदी की कीमतों में हल्की से मध्यम गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला, ज्वेलरी इंडस्ट्री की ओर से लगातार सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की मांग की जा रही है। अगर वित्त मंत्री बजट में ड्यूटी कटौती का ऐलान करती हैं, तो घरेलू बाजार में कीमतों पर तुरंत दबाव बन सकता है। दूसरा, हाल के दिनों में रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के आसपास बड़े निवेशक प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है।
लंबी अवधि में तेजी का भरोसा
हालांकि अल्पकाल में गिरावट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और ग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी का रुख मजबूत बना रहेगा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशक सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं। वहीं, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सोलर सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आने वाले समय में चांदी 4 से 5 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए सलाह
जो लोग सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए बजट (1 फरवरी) का इंतजार करना बेहतर माना जा रहा है। अगर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती होती है तो कीमतों में राहत मिल सकती है। वहीं निवेशकों को एक्सपर्ट्स की सलाह है कि किसी भी गिरावट पर घबराने के बजाय ‘Buy on Dips’ की रणनीति अपनाएं, क्योंकि अगले 1-2 साल में सोने और चांदी में दोबारा मजबूती देखने को मिल सकती है।