Edited By ,Updated: 27 May, 2024 05:35 AM

कट्टर इतालवी पत्रकार ओरियाना फल्लासी और उनके 14 मेहमान जिनका, उन्होंने साक्षात्कार लिया था, उनमें हैनरी किसिंजर, जॉर्डन के किंग हुसैन, यासिर अराफात, श्रीमती गोल्डा मेयर, इंदिरा गांधी, जुल्फिकार अली भुट्टो, मोहम्मद रजा शाह पहलवी, साइप्रस के...
कट्टर इतालवी पत्रकार ओरियाना फल्लासी और उनके 14 मेहमान जिनका, उन्होंने साक्षात्कार लिया था, उनमें हैनरी किसिंजर, जॉर्डन के किंग हुसैन, यासिर अराफात, श्रीमती गोल्डा मेयर, इंदिरा गांधी, जुल्फिकार अली भुट्टो, मोहम्मद रजा शाह पहलवी, साइप्रस के राष्ट्रपति आर्कबिशप मकारियोस और वियतनामी स्वतंत्रता सेनानी जनरल गियाप और गुयेन वान थीऊ जैसे कुछ नाम प्रसिद्ध हैं वे सबके सब मर चुके हैं। जो कुछ बचा है वह उनके शब्द हैं, जो अक्सर उनके साथ हुई उत्तेजक, तीखी बातचीत के दौरान कहे गए थे, जो बाद में उनकी पुस्तक ‘इंटरव्यू विद हिस्ट्री (1976)’ में प्रकाशित हुए।
फल्लासी ने इतिहास पर अविश्वास किया। उन्हें लगा कि यह ‘घटनाओं से भरा उपन्यास’ और सैकेंडहैंड निर्णय है। उन्होंने आधुनिक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दी और कहा, ‘‘आज का इतिहास उसी क्षण लिखा जाता है जब ऐसा होता है। इसे प्रैस, रेडियो, टैलीविजन के माध्यम से तुरंत प्रसारित किया जा सकता है।’’ फल्लासी-एक निपुण पेशेवर थी जो हर साक्षात्कार को टेप करती थी। हालांकि, अक्सर ये सावधानियां पर्याप्त नहीं थीं। इसराईली नेता श्रीमती गोल्डा मेयर के साथ उनके सत्र के टेप रोम के एक बंद होटल के कमरे से रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। कर्नल गद्दाफी द्वारा उनकी सामग्री के विस्तृत उल्लेख से फल्लासी को उन पर उनकी चोरी की साजिश रचने का संदेह हुआ। उसने अपने नोट्स को ईमानदारी से लिखा लेकिन पाया कि जनरल गियाप जैसे उसके कुछ मेहमान चाहते थे कि वह केवल उनका संस्करण ही छापे। उसने गियाप का मजाक उड़ाया और फिर उसके साथ अपनी रिपोर्ट भी छापी। (गियाप के साथ उनके साक्षात्कार ने डा. किसिंजर को इतना प्रभावित किया कि वह उनसे साक्षात्कार के लिए सहमत हो गए।)
दूसरों ने बाद में अपनी टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया और मांग की कि उनके अविवेक को समाप्त किया जाना चाहिए। डा. किसिंजर ने अपना हास्य सांझा नहीं किया जब उन्होंने अपनी स्वीकारोक्ति का हवाला दिया कि वह खुद को ‘एक अद्भुत, रोमांटिक चरित्र वाले चरवाहे के रूप में देखते हैं जो अपने घोड़े के साथ शहर में अकेले घूमता है।’फल्लासी फिलिस्तीन के यासिर अराफात के प्रति दयालु हैं, उन्होंने उनके तपस्वी दावे को स्वीकार करते हुए कहा कि वह पूरी उम्र कुंवारे रहे क्योंकि उनके अनुसार फिलिस्तीन ही उनकी पत्नी है। (हालांकि बाद में उन्होंने शादी की)।
उपमहाद्वीप में कई लोगों के लिए, फरवरी 1972 में श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ फल्लासी के साक्षात्कार में जुल्फिकार अली भुट्टो के अधीर जवाब आज भी दिलचस्प हैं। फल्लासी ने याद दिलाया कि किसिंजर ने भुट्टो को ‘बहुत बुद्धिमान, बहुत प्रतिभाशाली’ बताया था और इंदिरा गांधी को एक ही अपमानजनक शब्द में समेट कर कहा कि गांधी अमीरों के साथ तुकबंदी करती थी। मुजीबुर रहमान के बारे में भुट्टो की राय पर इंदिरा का कहना था कि, ‘भुट्टो एक जन्मजात झूठा है और वह अपने मूड और अपने बीमार दिमाग के विकारों के आधार पर, बेतरतीब ढंग से बात करता है।’श्रीमती गांधी के बारे में, भुट्टो के पास कोई नरम शब्द नहीं थे। भुट्टो के अनुसार, ‘‘गांधी एक औसत बुद्धि और औसत दर्जे की महिला थीं। गांधी एक कल्पना से रहित महिला थीं।’’
भुट्टो के अहंकार की कोई सीमा नहीं थी। एक मनगढ़ंत कहानी यह है कि अक्तूबर, 1963 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने भुट्टो से मुलाकात की। कैनेडी ने उनसे कहा, ‘‘यह बहुत बुरा है कि आप अमरीकी नहीं हैं क्योंकि यदि आप होते, तो मैं आपको अपने मंत्रिमंडल में नियुक्त करता।’’ भुट्टो ने जवाब दिया, ‘‘यदि मैं अमरीकी होता, तो मैं आपके मंत्रिमंडल में नहीं बल्कि संयुक्त राज्य अमरीका का राष्ट्रपति होता!’’ ‘‘श्रीमती गांधी ने मेरे बारे में क्या कहा?’’ उन्होंने फल्लासी से पूछा। श्रीमती गांधी ने उनसे कहा था, ‘‘भुट्टो बहुत संतुलित व्यक्ति नहीं हैं। जब वह बात करते हैं, तो आप कभी नहीं समझ पाते कि उनका क्या मतलब है।’’ उन्होंने भुट्टो के भारत के साथ एकजुटता के साहसिक सुझाव का विरोध किया। बाद में फल्लासी के साथ अपने स्वयं के साक्षात्कार में, भुट्टो ने दावा किया कि ‘‘यदि भारत और पाकिस्तान संघीकृत देश बन जाते, तो मुझे इंदिरा गांधी से पद छीनने में कोई परेशानी नहीं होती। मैं उसके साथ बौद्धिक टकराव से नहीं डरता।’’
नई दिल्ली से इंदिरा गांधी ने भुट्टो के साक्षात्कार की पूरी प्रतिलिपि मांगी। दुखी भुट्टो ने फल्लासी को साक्षात्कार को ‘खत्म’ करने के लिए मनाने के लिए तुरंत रोम में अपने राजदूत को भेजा, ताकि यह कहा जा सके कि श्रीमती गांधी के बारे में उनकी टिप्पणी फल्लासी द्वारा ‘कल्पना’ की गई थी। फल्लासी ने मना कर दिया। आज मोदी के कट्टर भाजपा अंधराष्ट्रवाद की पृष्ठभूमि में, आधी सदी बाद भी श्रीमती गांधी का फल्लासी से पूछा गया सवाल असहनीय रूप से मार्मिक बना हुआ है ‘लोगों के लिए धर्म के लिए एक-दूसरे को मारना कैसे संभव है?’ और उन्होंने अपने उत्तराधिकारी नरेंद्र मोदी के लिए यह मानवीय सलाह जोड़ी कि अल्पसंख्यकों को किसी देश से खत्म नहीं किया जा सकता।
आधुनिक साक्षात्कारकत्र्ता फल्लासी की फोरैंसिक सूक्ष्मता से सीख सकते हैं। जहां एक ओर फल्लासी चिकित्सक की छुरी का उपयोग करती थी, वहीं दूसरी ओर आधुनिक साक्षात्कारकत्र्ता अपने साक्षात्कारों के दौरान लोहा काटने की आरी का इस्तेमाल करते हैं। आज का मीडिया एक शोर-शराबे वाले बूचडख़ाने की तुलना में सूचनात्मक प्रकटीकरण का इस्तेमाल करता है जिसमें साक्षात्कारकत्र्ता कसाई बन जाते हैं और उनके विषय रक्तरंजित शिकार बन जाते हैं।-एफ.एस. एजाजुद्दीन