Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Jan, 2026 12:38 PM

भारत के कच्चे तेल (क्रूड) के आयात की औसत कीमत जनवरी 2026 में 59.92 डॉलर प्रति बैरल रही, जो दिसंबर 2025 के 62.2 डॉलर से कम है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2021 के बाद पहली बार यह कीमत 60 डॉलर से नीचे आई है।
बिजनेस डेस्कः भारत के कच्चे तेल (क्रूड) के आयात की औसत कीमत जनवरी 2026 में 59.92 डॉलर प्रति बैरल रही, जो दिसंबर 2025 के 62.2 डॉलर से कम है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2021 के बाद पहली बार यह कीमत 60 डॉलर से नीचे आई है।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों के अनुसार भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत जून 2026 तक 50 डॉलर या उससे कम जा सकती है, जबकि मार्च तक यह 53.31 डॉलर तक गिर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती संभव है।
आर्थिक फायदा
भारत अपनी तेल जरूरत का लगभग 88% आयात से पूरा करता है। प्रति बैरल 1 डॉलर की गिरावट से सालाना आयात बिल में लगभग 13,000 करोड़ रुपए की बचत होती है। पिछले वित्त वर्ष में आयात बिल 161 अरब डॉलर था, जबकि चालू वित्त वर्ष में यह नवंबर तक घटकर 80.9 अरब डॉलर हो गया।
सप्लाई अधिक, कीमतें गिरने की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति, मांग से 38.5 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक होगी। सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने अरब लाइट क्रूड की कीमत लगातार तीसरी बार घटाई है।
ब्रेंट और WTI का अंतर घटा
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट और अमेरिकी WTI के बीच कीमत का अंतर अब केवल 4 डॉलर प्रति बैरल है। इससे अमेरिकी कच्चे तेल की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हुई है और भारतीय रिफाइनरियां मध्य-पूर्व या अन्य क्षेत्र से तेल खरीदने को प्राथमिकता दे सकती हैं।
भू-राजनीतिक जोखिम
वेनेजुएला की राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण अल्पकालिक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं लेकिन लंबी अवधि में सप्लाई अधिक रहने के कारण तेल की कीमतों में नरमी जारी रहने की संभावना है।