$4 ट्रिलियन क्लब में Nvidia की एंट्री, भारत की GDP के बराबर पहुंची वैल्यू

Edited By Updated: 10 Jul, 2025 01:16 PM

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अमेरिकी चिप निर्माता Nvidia ने इतिहास रच दिया है। कंपनी का मार्केट कैप $4 ट्रिलियन को पार कर गया है, जिससे यह मुकाम छूने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है। यह आंकड़ा भारत की मौजूदा GDP ($4.2 ट्रिलियन) के लगभग बराबर है।

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी चिप निर्माता Nvidia ने इतिहास रच दिया है। कंपनी का मार्केट कैप $4 ट्रिलियन को पार कर गया है, जिससे यह मुकाम छूने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है। यह आंकड़ा भारत की मौजूदा GDP ($4.2 ट्रिलियन) के लगभग बराबर है।

IMF के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2025 के अंत तक $4.27 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है लेकिन Nvidia अगर अपने स्टॉक में सिर्फ 5% और तेजी पाती है, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था से अधिक वैल्यूएबल हो जाएगी।

AI बूम ने बढ़ाया शेयरों का दम

AI सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग ने Nvidia को इस मुकाम तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। बुधवार को Nasdaq पर कंपनी के शेयरों में करीब 3% की तेजी आई, जिससे उसका बाजार पूंजीकरण नई ऊंचाई पर पहुंच गया।

2025 में अब तक Nvidia के शेयर 18% बढ़ चुके हैं, जबकि पिछले 12 महीनों में इनमें 24% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह प्रदर्शन Nasdaq Composite इंडेक्स से भी बेहतर रहा है।

अब ब्राउजर मार्केट में उतरी Nvidia, Google Chrome को देगी टक्कर

Nvidia ने अपनी साझेदार कंपनी Perplexity AI के साथ मिलकर ‘Comet’ नामक एक नया AI-पावर्ड वेब ब्राउज़र लॉन्च किया है। यह ब्राउज़र पारंपरिक सर्च के मुकाबले पूरी तरह से AI पर आधारित होगा — यूजर सवाल पूछ सकेंगे, प्रोडक्ट तुलना कर सकेंगे, सारांश पढ़ सकेंगे और काम करवाने के लिए AI असिस्टेंट का इस्तेमाल कर सकेंगे।

Comet को जेफ बेजोस और सॉफ्टबैंक जैसे निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के ब्राउज़िंग अनुभव को पूरी तरह बदलना है — जहां सर्च इंजन सिर्फ लिंक न दिखाए, बल्कि AI के जरिए समाधान दे।

Chrome को कड़ी चुनौती

Perplexity AI का मकसद Google Chrome की बाजार हिस्सेदारी को चुनौती देना है। जून 2025 के StatCounter आंकड़ों के अनुसार, Chrome की वैश्विक बाजार में 68% हिस्सेदारी है, जो किसी भी ब्राउज़र में सबसे अधिक है। इसके बाद Safari, Microsoft Edge और Firefox का स्थान आता है।

Perplexity का मानना है कि लोग AI के ज़रिए अधिक स्मार्ट और दक्ष तरीके से वेब एक्सप्लोर करना चाहेंगे — जिससे ब्राउज़र का इस्तेमाल केवल नेविगेशन टूल से बढ़कर एक AI असिस्टेंट की तरह हो जाएगा।
 

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