Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Jan, 2026 11:32 AM

आगामी बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी जिसने पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे का सूत्र प्रदान करता है। केंद्र द्वारा लगाए गए उपकर...
बिजनेस डेस्कः आगामी बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी जिसने पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे का सूत्र प्रदान करता है। केंद्र द्वारा लगाए गए उपकर और अधिभार विभाज्य निधि का हिस्सा नहीं हैं। वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है और समय-समय पर गठित किया जाता है।
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 को किया गया था। पनगढ़िया के नेतृत्व में वित्त आयोग के सदस्यों सेवानिवृत्त नौकरशाह एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर और आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे ने 17 नवंबर 2025 को मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी। आयोग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी रिपोर्ट की एक प्रति सौंपी।
हालांकि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन केंद्र सरकार हमेशा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करती रही है। संबंधित शर्तों (टीओआर) के अनुसार, 16वें आयोग को एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण के साथ-साथ राज्यों के बीच ऐसी आय के संबंधित हिस्सों के आवंटन, राज्यों को अनुदान सहायता, आपदा प्रबंधन पहलों के वित्तपोषण पर व्यवस्थाओं की समीक्षा आदि पर सिफारिशें शामिल हैं। एन. के. सिंह के नेतृत्व में गठित पूर्व 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्यों को छह साल की अवधि यानी 2020-21 से 2025-26 के दौरान केंद्र के विभाज्य कर कोष का 41 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए जो कि 14वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित स्तर के बराबर है।
ऐतिहासिक रूप से, वित्त आयोग राज्यों के केंद्रीय करों में हिस्सेदारी का निर्धारण जनसंख्या, क्षेत्रफल, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, राजकोषीय प्रयास, आय अंतर और वन क्षेत्र के भारित योग के आधार पर करते रहे हैं। यह मुद्दा लंबे समय से केंद्र एवं राज्यों, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है जिनका कहना है कि उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिला है। दक्षिणी राज्यों ने भी जनसंख्या को विकेंद्रीकरण के मानदंड के रूप में उपयोग किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में उनकी सफलता के बावजूद यह उनके साथ अन्याय करता है।
गौरतलब है कि 15वें वित्त आयोग ने जनसंख्या को 15 प्रतिशत, क्षेत्रफल को 15 प्रतिशत, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को 12.5 प्रतिशत, वन आवरण एवं पारिस्थितिकी को 10 प्रतिशत और कर एवं राजकोषीय प्रयासों को 2.5 प्रतिशत भार दिया था। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई.वी. रेड्डी के नेतृत्व में 14वें वित्त आयोग ने कर वितरण को विभाज्य निधि के 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया जो कि 13वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित था। 14वें वित्त आयोग की ये अनुशंसाएं एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 तक लागू रहीं।