Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Jan, 2026 11:31 AM

घरेलू बॉन्ड बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ग्रामीण रोजगार योजना में किए गए बदलावों के बाद राज्य सरकारों की उधारी जरूरत बढ़ने वाली है, जिसका सीधा असर बॉन्ड बाजार पर पड़ सकता है। विकसित भारत गारंटी फॉर
बिजनेस डेस्कः घरेलू बॉन्ड बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ग्रामीण रोजगार योजना में किए गए बदलावों के बाद राज्य सरकारों की उधारी जरूरत बढ़ने वाली है, जिसका सीधा असर बॉन्ड बाजार पर पड़ सकता है। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन के तहत खर्च का बड़ा बोझ राज्यों पर आने से अगले वित्त वर्ष में बाजार में बॉन्ड की भारी सप्लाई आने की आशंका जताई जा रही है।
बजट 2026-27 से पहले बॉन्ड सप्लाई का डर
जैसे-जैसे निवेशकों की निगाहें बजट 2026-27 पर टिक रही हैं, वैसे-वैसे बॉन्ड सप्लाई के आंकड़े बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में कुल सरकारी बॉन्ड सप्लाई 30.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। इसमें केंद्र सरकार की उधारी करीब 16.5 लाख करोड़ रुपए और राज्य सरकारों की उधारी लगभग 14 लाख करोड़ रुपए रहने की संभावना है।
केंद्र संभला, राज्यों पर बढ़ा दबाव
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को काबू में रखा है, लेकिन इसकी कीमत राज्यों को चुकानी पड़ सकती है। रोजगार योजनाओं का कुछ खर्च राज्यों पर डाल दिए जाने से उन्हें अतिरिक्त उधारी करनी होगी। नतीजतन, बॉन्ड बाजार को अब केंद्र और राज्यों दोनों की भारी सप्लाई एक साथ झेलनी पड़ेगी।
चालू वित्त वर्ष के अंत तक ही कुल सरकारी बॉन्ड सप्लाई करीब 27 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें अकेले राज्यों की हिस्सेदारी 12.45 लाख करोड़ रुपए की होगी। इससे अगले साल दबाव और बढ़ने की आशंका है।
RBI की चेतावनी, राज्यों की उधारी में तेजी
भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही आगाह कर चुका है कि पिछले दो दशकों में राज्यों की बाजार से उधारी तेज़ी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में ही राज्यों की उधारी में 21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। RBI के मुताबिक, इससे बॉन्ड यील्ड पर दबाव बढ़ रहा है और केंद्र व निजी कंपनियों के लिए बाजार से उधारी की गुंजाइश सिमट रही है।
FY27 में 5.5 लाख करोड़ के बॉन्ड होंगे मैच्योर
आने वाले वित्त वर्ष में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड मैच्योर होने वाले हैं। जानकारों का मानना है कि यदि RBI के पास मौजूद बॉन्ड मैच्योर होते हैं, तो नकदी की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इससे निपटने के लिए RBI लंबी अवधि के बॉन्ड में स्विच कर सकता है या सरकार ट्रेजरी बिल जारी कर सकती है।
घाटा काबू में, लेकिन दबाव बरकरार
कोटक महिंद्रा एएमसी के अनुसार, FY27 में सरकार का राजकोषीय घाटा 4.3 फीसदी के आसपास रह सकता है। हालांकि, बड़ी मैच्योरिटी और ऊंची उधारी के चलते कुल बॉन्ड सप्लाई का आंकड़ा बड़ा ही बना रहेगा यानी घाटा नियंत्रण में होने के बावजूद बाजार पर दबाव कम होने के आसार नहीं हैं।
समाधान मुश्किल, RBI पर बढ़ती निर्भरता
IDFC First Bank की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉन्ड बाजार में मांग-सप्लाई का संतुलन बनाए रखने के लिए हाल के वर्षों में RBI पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। घरेलू बचत में कमी और केंद्र व राज्यों की बढ़ती बॉन्ड सप्लाई ने हालात और चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं। जब तक निवेश के नए घरेलू और विदेशी स्रोत नहीं बनते, तब तक दबाव बना रहने की आशंका है।
यील्ड ऊंची रहने का अनुमान
इन तमाम संकेतों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई में नरमी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बावजूद, भारी बॉन्ड सप्लाई यील्ड को नीचे नहीं आने देगी। अनुमान है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.60 से 6.70 फीसदी के दायरे में बनी रह सकती है। RBI के सीधे हस्तक्षेप के बिना बड़ी राहत की उम्मीद फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।