Braj ki Holi 2026 : जल्द ही शुरू होने वाला है नंदलाल की नगरी में होली का महोत्सव, जानें कब से शुरू होगा ब्रज का 40 दिवसीय उत्सव

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 09:32 AM

braj ki holi 2026

Braj ki Holi 2026 : ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और भक्ति का महाकुंभ है। साल 2026 में भी कान्हा की नगरी मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में होली का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर...

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Braj ki Holi 2026 : ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और भक्ति का महाकुंभ है। साल 2026 में भी कान्हा की नगरी मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में होली का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में होली की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। इस बार ब्रज का 40 दिवसीय रंगोत्सव जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर मार्च के पहले सप्ताह तक चलेगा।

कब से शुरू हो रहा है 40 दिवसीय रंगोत्सव ?
ब्रज में होली का आगाज़ पारंपरिक रूप से बसंत पंचमी के शुभ अवसर से होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को है। इसी दिन से बांकेबिहारी मंदिर सहित पूरे ब्रज के मंदिरों में गुलाल उड़ना शुरू हो जाएगा और होली का डांडा स्थापित कर दिया जाएगा। अगले 40 दिनों तक ब्रज की हर कुंज-गली होली है के जयकारों से गूंज उठेगी। सेवायत गोस्वामी समुदाय ठाकुरजी को प्रतिदिन अबीर-गुलाल अर्पित करेंगे और भक्तों पर प्रसाद स्वरूप रंग बरसाया जाएगा।

Special preparations at Banke Bihari Temple बांके बिहारी मंदिर में विशेष तैयारियां

मंदिर में रसायनों वाले रंगों का उपयोग नहीं होता। प्राचीन परंपरा के अनुसार, हजारों क्विंटल टेसू के फूलों को पानी में उबालकर प्राकृतिक पीला और केसरिया रंग तैयार किया जा रहा है।

होली के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन की व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश और निकास द्वार सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

होली के दिनों में ठाकुरजी को विशेष भोग लगाया जाता है, जिसमें चंद्रकला, गुझिया और ठंडाई प्रमुख होती है।

ठमार और फूलों वाली होली

बरसाना की लठमार होली: यह दुनिया की सबसे अनोखी होली है। यहां की गोपियां नंदगांव से आए ग्वालों पर प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह राधा-कृष्ण के प्रेम और हास-परिहास का जीवंत रूप है।

फूलों वाली होली: वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में रंगभरनी एकादशी के दिन फूलों की होली खेली जाती है। मंदिर के पुजारी भक्तों पर कई क्विंटल ताजे फूलों की वर्षा करते हैं, जो किसी अलौकिक दृश्य से कम नहीं होता।

गोकुल की छड़ीमार होली: छोटे कान्हा की नगरी गोकुल में लाठियों की जगह कोमल छड़ियों से होली खेली जाती है, ताकि बाल-कृष्ण को चोट न लगे।

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