Guru Ast 2022: अस्त होने जा रहे हैं बृहस्पति, ये उपाय लाएंगे जीवन में अच्छे परिवर्तन

Edited By Updated: 17 Feb, 2022 08:37 AM

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वैदिक ज्योतिष में देव गुरु बृहस्पति को नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और उनके गोचर को भी एक महत्वपूर्ण ज्योतिष घटना माना जाता है। इन्हें अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। बृहस्पति हमारे

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Guru Ast 2022: वैदिक ज्योतिष में देव गुरु बृहस्पति को नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और उनके गोचर को भी एक महत्वपूर्ण ज्योतिष घटना माना जाता है। इन्हें अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। बृहस्पति हमारे जीवन में उन्नति की राह खोलते हैं। इन्हें ज्ञान, कर्म, धन, पुत्र और विवाह का कारक माना जाता है। इन्हें अध्यात्म का कार्य माना जाता है और इन्हें दार्शनिक का दर्जा भी दिया गया है। यह ज्ञान के दाता हैं। ऐसा माना जाता है कि देव गुरु बृहस्पति हमारे आध्यात्मिक ज्ञान व हमारी बुद्धि को निर्देशित करते हैं और जिस जातक पर यह प्रसन्न होते हैं, उसे जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं रहती। समाज में खूब यश-सम्मान मिलता है।

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जिन लोगों की कुंडली में, होरोस्कोप में बृहस्पति यानी जुपिटर का प्रभाव अधिक होता है, उस व्यक्ति का मन धर्म और आध्यात्मिक कार्य में बहुत अधिक लगता है। देव गुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च के होते हैं और मकर राशि में नीच के होते हैं। धनु और मीन इनकी अपनी राशियां हैं। देव गुरु बृहस्पति को पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा और भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी माना गया है।

देव गुरु बृहस्पति 24 फरवरी को कुंभ राशि में अस्त होने जा रहे हैं। चूंकि बृहस्पति ग्रह को संपन्नता, विवाह, वैभव, विवेक, धार्मिक कार्य आदि का कारक माना जाता है इसलिए इनका अस्त होना शुभ नहीं होता। गुरु ग्रह जब अस्त होते हैं, तब शुभ-मांगलिक कार्यों को करने की भी मनाही होती है। इस दौरान शादी, मुंडन, नामकरण जैसे संस्कार नहीं किये जाते।

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2022 Guru Tara Ast and Uday Timings: बृहस्पति ग्रह 24 फरवरी 2022 को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर कुंभ राशि में अस्त हो जाएंगे और 26 मार्च 2022 को शाम 6 बजकर 36 मिनट पर उदित होंगे। गुरु के अस्त होने के कारण धार्मिक और मांगलिक कार्य करना इस दौरान वर्जित होगा। गुरु के अस्त होने से लोगों में भौतिकता का विकास होगा, धन और दैहिक सुख के प्रति लोगों में आकर्षण बढ़ेगा। धार्मिक क्रियाकलापों से भी मन कुछ हटा रहेगा।

गुरु के अस्त होने का सबसे प्रतिकूल प्रभाव कर्क, धनु और मीन राशियों पर पड़ सकता है इसलिए इन राशियों के लोगों को गुरु अस्त के दौरान गुरु ग्रह से संबंधित उपाय करने चाहिए।

गुरु का अस्त होना यूं तो वैदिक ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता लेकिन गुरु के कुंभ राशि में अस्त होने के कारण कुछ राशियों को इस दौरान सुखद फल भी प्राप्त हो सकते हैं। गुरु अस्त के दौरान गुरु की शत्रु राशियों वृषभ, तुला के साथ ही बुध ग्रह के स्वामित्व वाली मिथुन और कन्या राशि के जातकों को भी सुखद फल प्राप्त हो सकते हैं। इन राशियों के जातक इस दौरान करियर में आगे बढ़ सकते हैं और पैसा कमाने के नए स्रोत भी इस समय इन राशि के लोगों को मिल सकते हैं। पारिवारिक जीवन में भी अच्छे परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

Guru Grah Upay: गुरु के प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए गुरु से संबंधित उपाय करने चाहिए। जैसे पीले वस्त्र आपको पहनने चाहिए या पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए। गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। बृहस्पतिवार के दिन किसी अस्पताल में जाकर मरीजों को फल वितरित करने चाहिए।

जो निर्धन छात्र-छात्राएं हैं, उनको शिक्षण सामग्री का दान करना चाहिए।

हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर तकिए के नीचे रख दें। ऐसा करने से गुरु बृहस्पति शुभ फल देते हैं और नौकरी, व्यापार व कारोबार में उन्नति होती है।

इसके साथ ही केले के वृक्ष की पूजा करने से भी आपको लाभ मिल सकते हैं।

बड़े फैसले अनुभवी लोगों से विचार करके लें।

गुरमीत बेदी
gurmitbedi@gmail.com

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