Parivartini Ekadashi: दुर्लभ संयोगों के साथ इस दिन रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 24 Sep, 2023 11:07 AM

parivartini ekadashi

हिंदू पंचांग के अनुसार भादों माह में आने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि

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Parivartini Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार भादों माह में आने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को यह व्रत रखा जाएगा। कहते हैं इस दिन भगवान विष्णु नींद में करवट बदलते हैं। परिवर्तिनी एकादशी को डोल ग्यारस, पद्मा एकादशी और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए यह दिन बहुत ही खास और महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष की परिवर्तिनी एकादशी बेहद ही शुभ होने वाली है। जगत के पालनहार की कृपा से इस दिन बहुत से शुभ संयोगों को निर्माण हो रहा है। मान्यताओं के अनुसार इस योग में पूजा-अर्चना करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का खास आशीर्वाद मिलता है। तो चलिए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी के शुभ संयोग और मुहूर्त।

Parivartini Ekadashi Muhurat परिवर्तिनी एकादशी 2023 मुहूर्त
भाद्रपद शुक्ल परिवर्तिनी एकादशी तिथि की शुरुआत 25 सितंबर 2023 सुबह 7 बजकर 55 से होगी और 26 सितंबर 2023 सुबह 05 बजे इसका समापन होगा।
पूजा का समय - सुबह 09.12-सुबह 10.42
राहुकाल - सुबह 07.41 से सुबह 09.12

These auspicious yogas are being formed on Parivartini Ekadashi परिवर्तिनी एकादशी पर बन रहे हैं ये शुभ योग
सुकर्मा योग- 25 सितंबर 2023 दोपहर 03:23 से 26 सितंबर 2023 सुबह 11:46 तक
इस योग में श्री हरि की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

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सर्वार्थ सिद्धि योग- 25 सितंबर सुबह 11.55 से 26 सितंबर सुबह 06.11 तक
इस समय में किया गया कोई भी काम विफल नहीं जाता।

रवि योग - सुबह 06:11 से सुबह 11:55 तक
इस समय में किसी भी शुभ काम का श्री गणेश बिना किसी शंका के शुरू किया जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन योगों में पूजा करने से आराधना का दोगुना फल मिलता है।

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Why is it called Parivartini Ekadashi क्यों कहते हैं परिवर्तिनी एकादशी
मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन वो नींद में अपनी करवट बदलते हैं। इस वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

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