Sabarimala Temple : सबरीमाला मंदिर में घी बिक्री को लेकर बड़ा आरोप, HC की जांच से उठे सवाल

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 11:23 AM

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Sabarimala Temple : केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की कथित लूट के बाद अब प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। घी की बिक्री के नाम पर लाखों रुपये के गबन के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए केरल...

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Sabarimala Temple : केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की कथित लूट के बाद अब प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। घी की बिक्री के नाम पर लाखों रुपये के गबन के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए केरल हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

पूरा मामला क्या है?

आरोप है कि महज दो महीनों के भीतर मंदिर में घी के प्रसाद की बिक्री के दौरान करीब 35 लाख रुपये की वित्तीय हेराफेरी की गई। इस अनियमितता की भनक सबसे पहले मंदिर के विजिलेंस अधिकारी को लगी। इसके बाद जब आंतरिक ऑडिट कराया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने काउंटर प्रभारी सुनील पोट्टी को तत्काल निलंबित कर दिया।

इस प्रकरण में मंदिर के विजिलेंस कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और राज्य के विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो को निर्देश दिए कि वे पूरे मामले की गहराई से जांच कर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करें।

घी की बिक्री का सिस्टम क्या है?

सबरीमाला दर्शन के दौरान भक्त भगवान अय्यप्पा को नारियल और घी अर्पित करते हैं। इसी चढ़ाए गए घी से बनने वाला प्रसाद आथिया सिष्टम दोबारा श्रद्धालुओं को बेचा जाता है, जो TDB के लिए आय का एक बड़ा स्रोत है। TDB द्वारा घी को 100 मिलीलीटर के पैकेट में पैक कराया जाता है। इस प्रक्रिया में घी सहित सारी सामग्री बोर्ड की होती है, जबकि पैकिंग का ठेका निजी एजेंसी को दिया जाता है। ठेकेदार को प्रति पैकेट 20 पैसे का भुगतान किया जाता है और एक पैकेट की कीमत 100 रुपये तय है।

गबन कैसे सामने आया ?

जांच में खुलासा हुआ कि 17 नवंबर से 26 दिसंबर 2025 के बीच ठेकेदार ने कुल 3,52,050 पैकेट तैयार किए थे, जिन्हें बिक्री के लिए मंदिर प्रशासन को सौंपा गया। इनमें से अलग-अलग दिनों में मरामाथ बिल्डिंग स्थित काउंटर से लगभग 89,300 पैकेट बेचे गए।

इनमें से 143 पैकेट खराब निकले और 27 दिसंबर तक काउंटर में सिर्फ 28 पैकेट शेष पाए गए। खराब और बचे पैकेटों को घटाने के बाद कुल 89,129 पैकेट की बिक्री से मिलने वाली राशि बोर्ड को जमा होनी चाहिए थी। लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक कर्मचारियों ने केवल 75,450 पैकेट की राशि ही जमा की।

इस तरह 13,679 पैकेट की बिक्री की रकम, यानी करीब 13.67 लाख रुपये, का कोई हिसाब नहीं मिला। अदालत ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी राशि का कम समय में जमा न होना बेहद चिंताजनक है और इसे साधारण लेखा-जोखा की गलती नहीं माना जा सकता। इसी कारण अब पूरे मामले की विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए हैं।

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