Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Feb, 2026 03:32 PM

संत दादू की सिद्धि से प्रभावित होकर एक दारोगा उन्हें अपना गुरु बनाने की इच्छा से उनकी खोज में निकल पड़ा। जब दारोगा लगभग आधा जंगल पार कर गया तो उसने देखा कि एक झोंपड़ी के पास सिर्फ धोती पहने एक साधारण सा व्यक्ति अपने काम में मग्न है।
Sant Dadu Dayal Story : संत दादू की सिद्धि से प्रभावित होकर एक दारोगा उन्हें अपना गुरु बनाने की इच्छा से उनकी खोज में निकल पड़ा। जब दारोगा लगभग आधा जंगल पार कर गया तो उसने देखा कि एक झोंपड़ी के पास सिर्फ धोती पहने एक साधारण सा व्यक्ति अपने काम में मग्न है।
वह पास जाकर बोला, “क्या, तुझे मालूम है कि संत दादू का आश्रम कहां है?”
वह व्यक्ति दारोगा की बात अनसुनी कर अपना काम करता रहा। दारोगा ने गालियां देते हुए उस व्यक्ति को धमकाया, “तुझे पता नहीं कौन तुझसे बात कर रहा है?”
इसका भी उस व्यक्ति पर कोई असर नहीं हुआ। दारोगा का मन तो हो रहा था, वहीं उसकी खाल खींच ले, लेकिन संत दादू से मिलने की इच्छा के कारण वह गुस्से को दबाकर आगे बढ़ गया।
थोड़ा आगे जाने पर दारोगा को एक और व्यक्ति मिला। दारोगा ने उससे भी पूछा, “क्या, मालूम है संत दादू कहां रहते है?”

उस व्यक्ति ने कहा, “वह तो उधर ही रहते है जिधर से आप आ रहे हैं। मैं भी उनके दर्शन के लिए ही जा रहा हूं। आप मेरे साथ चलिए।”
दारोगा उसके साथ चल पड़ा। जब दोनों अपने गंतव्य पर पहुंचे तो दारोगा लज्जित हो उठा। संत दादू वही व्यक्ति थे जिन्हें थोड़ी देर पहले दारोगा ने गालियां दी थीं। वह दादू के चरणों में गिर कर माफी मांगने लगा-मुझसे बड़ा अपराध हो गया।
दारोगा की बात सुनकर संत दादू हंसते हुए बोले, “भाई, इसमें बुरा मानने की क्या बात है? कोई मिट्टी का एक घड़ा भी खरीदता है तो ठोक-बजा कर देख लेता है। तुम तो मुझे गुरु बनाने आए थे।” संत दादू की सहनशीलता ने दारोगा को हमेशा के लिए बदल दिया था।

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