Smile please: पूजा करना काफी नहीं, अच्छी सीख भी अपनाओ

Edited By Updated: 19 Feb, 2023 09:56 AM

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परमात्मा दरअसल वह पवित्र आत्मा है, जो हमारे अंदर ही है और जिसका कोई अंत नहीं। आत्मा-परमात्मा के कई नाम हैं।

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Smile please: परमात्मा दरअसल वह पवित्र आत्मा है, जो हमारे अंदर ही है और जिसका कोई अंत नहीं। आत्मा-परमात्मा के कई नाम हैं। परमात्मा, परमेश्वर, ईश्वर, भगवान सब एक ही तो हैं। अनेक हैं तो केवल उसके रूप। वैसे तो सभी भगवान को अलग-अलग ढंग से पूजते आ रहे हैं व पूजते रहेंगे, पर क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि इस इंसान रूपी भगवान को इतना सुंदर रूप व नाम क्यों मिला ? ये क्यों पूजे जाते हैं ? आखिर हैं तो ये हमारी ही तरह इंसान।

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सतयुग से ही इंसान स्वार्थी रहा है व उसमें तरह-तरह की बुराइयां विराजमान रही हैं। मनुष्यों में बुराइयां बढ़ती गईं व समस्या इतनी गंभीर हो गई कि मनुष्य का मनुष्य ही दुश्मन हो गया। कोई किसी को देख कर खुश नहीं है। बढ़ते हुए अत्याचार को देख कर स्वयं परमेश्वर को किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। वे सम्पूर्ण मनुष्य जाति को किसी न किसी रूप में बचाते आ रहे हैं।
आधुनिक युग में भी भगवान के प्रचार की कमी नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि मनुष्य प्रत्येक तरह की बुराइयों से ग्रस्त रहते हुए भी भगवान को पूजता है, परंतु उसके बताए हुए रास्ते, उसकी दी हुई शिक्षाओं को नहीं अपनाता और न ही जानने की कोशिश करता है कि ये भगवान क्यों हैं ? क्यों अमर हैं ? क्यों पूजे जाते हैं ?

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परमेश्वर यानी पवित्र आत्मा का मन स्वच्छ व उज्ज्वल है। किसी तरह की गलत भावनाएं, ईर्ष्या, द्वेष, जलन, अमीरी-गरीबी एवं लालच पवित्र मन में विराजमान नहीं रहते। हर तरह से संतुष्ट होती है पवित्र आत्मा। किसी तरह की चाहत उसे नहीं रहती। खुश रहना व खुशी बांटना भी नेक दिल वाली आत्मा का ही काम है। इन्हीं अच्छाइयों को ग्रहण कर भगवान अमर व पूजनीय हैं। अगर हम चाहें तो हम भी सच्चाई के रास्ते पर चल कर पूजनीय बन सकते हैं।

हम यह न सोचें कि यह कलियुग है। सब अपनी मस्ती में मस्त हैं तो क्यों न मैं भी मस्त रहूं व मनमानी करूं। आपने देखा होगा कि इस कलियुग में जब आप भारी समस्या में फंसे रहते हैं, तब ऐसे में कोई मनुष्य आपकी मदद कर आपको समस्या से मुक्त कर देता है। आप उसके प्रति गद्गद हो जाते हैं। उसका धन्यवाद करते हैं व उसकी आपके मन पर गहरी छाप पड़ती है, यानी आप उसे मन-मंदिर में बसा लेते हैं व उसे भूल नहीं पाते। याद आने पर उसका धन्यवाद करते हैं।

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इसी तरह जब आप भी किसी दूसरे की मदद करते हैं तो यही प्रतिक्रिया मदद लेने वाले के मन में भी होती है। यही मदद करता ही तो हमारा भगवान है। अगर हम परमेश्वर की सभी आज्ञाओं को मानें व उनके बताए रास्ते पर चलें तो हम भी भगवान हैं। हम भी दूसरे मनुष्यों के द्वारा पूजे जाएं तो क्यों न परमपिता परमात्मा के बताए हुए रास्ते पर चलें व अपनी पवित्र आत्मा को अपवित्र न होने दें।

PunjabKesari kundli

 

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