Edited By Niyati Bhandari,Updated: 23 Jan, 2026 11:27 AM

Time when Saraswati sits on tongue: हमारे शास्त्रों और बुजुर्गों की मान्यताओं में वाणी को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। अक्सर कहा जाता है कि दिन में एक ऐसा विशेष समय होता है जब जुबान पर स्वयं मां सरस्वती विराजमान रहती हैं। इस दौरान कही गई हर बात के...
Time when Saraswati sits on tongue: हमारे शास्त्रों और बुजुर्गों की मान्यताओं में वाणी को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। अक्सर कहा जाता है कि दिन में एक ऐसा विशेष समय होता है जब जुबान पर स्वयं मां सरस्वती विराजमान रहती हैं। इस दौरान कही गई हर बात के सच होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि उस समय बिना सोचे-समझे कुछ भी बोलने से बचना चाहिए और केवल शुभ एवं सकारात्मक बातें ही कहनी चाहिए।

रामायण में बताई गई पौराणिक कथा
रामायण के अनुसार, रावण के भाई कुंभकर्ण की वाणी को मां सरस्वती ने बांध दिया था। इसी कारण उन्होंने ब्रह्माजी से इंद्रासन के स्थान पर निद्रासन मांग लिया। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि वाणी कितनी प्रभावशाली होती है और उसका सही समय पर सही उपयोग कितना आवश्यक है।
कब जुबान पर विराजमान होती हैं मां सरस्वती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तड़के सुबह 3:20 बजे से 3:40 बजे तक का समय अत्यंत विशेष माना जाता है। यह समय ब्रह्म मुहूर्त का हिस्सा होता है, जो सुबह 3:00 बजे से 4:30 बजे तक रहता है।
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को देवताओं का समय कहा गया है। ऐसा विश्वास है कि इस अवधि में बोली गई बातें शीघ्र फलित होती हैं और मनोकामनाओं के पूर्ण होने की संभावना अधिक होती है।

ब्रह्म मुहूर्त का धार्मिक महत्व
ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, साधना और अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। इस समय मन और वातावरण दोनों ही शांत और शुद्ध होते हैं। जो व्यक्ति इस समय अपनी इच्छा या लक्ष्य को शब्दों में व्यक्त करता है, उसकी कामना के पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है।
इस समय क्या करें और क्या न करें?
क्या करें
मां सरस्वती का ध्यान करते हुए सकारात्मक और शुभ बातें बोलें।
अपनी मनोकामना श्रद्धा और विश्वास के साथ व्यक्त करें।
विद्यार्थियों के लिए यह समय अध्ययन हेतु अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस दौरान मंत्र जाप करें, “ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः”
मां शारदा की उपासना करें और ज्ञान-वृद्धि की कामना करें।

क्या न करें
किसी के लिए बुरा न बोलें और न ही नुकसान की कामना करें।
क्रोध, नकारात्मक विचार या अपशब्दों से बचें।
बिना सोच-समझे वाणी का प्रयोग न करें।
पौराणिक कथा से जुड़ा वाणी का महत्व
मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी माना जाता है। जिन पर उनकी कृपा होती है, वे जीवन में असंभव को भी संभव कर लेते हैं। ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त के दौरान अपनी वाणी को शुद्ध, सकारात्मक और मंगलमय रखना अत्यंत आवश्यक है।