बांग्लादेश में नहीं थम रहा 'नरसंहार', अब एक और हिंदू हत्या, कट्टरपंथियों ने 20 दिन में किया 7वां कत्ल

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 06:21 AM

another hindu has been murdered in bangladesh

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है और हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे हैं। ताजा मामला नौगांव जिले से सामने आया है, जहां 25 साल के हिंदू युवक मिथुन सरकार की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि कट्टरपंथियों ने...

इंटरनेशनल डेस्कः बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है और हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे हैं। ताजा मामला नौगांव जिले से सामने आया है, जहां 25 साल के हिंदू युवक मिथुन सरकार की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि कट्टरपंथियों ने युवक को डुबोकर मार डाला। बीते 20 दिनों में यह हिंदुओं की 7वीं हत्या है, जिसने पूरे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बांग्लादेश में समय बीत रहा है, दिन और हफ्ते बदल रहे हैं, जिले और नाम अलग-अलग हैं, लेकिन एक बात हर घटना में समान दिख रही है—शिकार बनने वाले लोग हिंदू हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये घटनाएं अलग-अलग हैं या फिर यह एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद डर फैलाना और अल्पसंख्यकों को चुप कराना है।

खौफ और असुरक्षा का माहौल

हिंदू समुदाय के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। बांग्लादेश के अल्पसंख्यक मंच का कहना है कि देश में सांप्रदायिक हिंसा बेहद चिंताजनक रफ्तार से बढ़ रही है। लोगों में भय है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि प्रशासन, मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय आखिर चुप क्यों है।

अल्पसंख्यक मंच के मुताबिक, 2 जनवरी को सत्य रंजन दास की हत्या, 3 जनवरी को खोकोन चंद्र दास की हत्या, 4 जनवरी को शुभो पोद्दार की हत्या और 5 जनवरी को राणा प्रताप बैरागी की हत्या। इन घटनाओं के बाद अब मिथुन सरकार की हत्या ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। मंच का कहना है कि जैसे-जैसे संसदीय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सांप्रदायिक हिंसा और तेज होती जा रही है। सिर्फ दिसंबर महीने में ही कम से कम 51 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं।

हत्या, लूट, आगजनी और अत्याचार

अल्पसंख्यक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं में शामिल हैं:

  • 10 हत्याएं

  • 10 चोरी और डकैती

  • घरों, दुकानों, मंदिरों और जमीनों पर कब्जे, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले

  • धर्म के नाम पर झूठे आरोप, ईशनिंदा और RAW का एजेंट बताकर हिरासत व यातना के 4 मामले

  • 1 बलात्कार की कोशिश

  • 3 शारीरिक हमले

जनवरी में भी जारी है हिंसा

जनवरी महीने में भी हिंसा का सिलसिला थमा नहीं है। 2 जनवरी को लक्ष्मीपुर में सत्यरंजन दास की करीब 96 डेसिमल जमीन पर खड़ी धान की फसल जला दी गई। 3 जनवरी को शरियतपुर में खोकन चंद्र दास की बेहद निर्ममता से हत्या कर दी गई—पहले काटा गया और फिर आग लगा दी गई। उसी दिन चटगांव के बोआलखाली उपजिला में मिलन दास के घर में डकैती हुई, पूरे परिवार को बंधक बना लिया गया। कोमिला के होमना इलाके में सानू दास के घर में भी लूटपाट की गई।

विधवा महिला के साथ अमानवीय अपराध

4 जनवरी को एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। झेनैदाह के कलिगंज इलाके में 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ बलात्कार किया गया। आरोपियों ने महिला को पेड़ से बांधा, उसके सिर के बाल मुंडवा दिए और बेरहमी से यातनाएं दीं। इस घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

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