भारत की राह पर चला जापान, लॉन्च किया 'चंद्रयान' SLIM, कैसे बनते हैं आकाशीय पिंड? अब खुलेगा रहस्य

Edited By Updated: 07 Sep, 2023 11:38 AM

japan launched chandrayaan slim know when it will land

जापान ने गुरुवार को घरेलू H-IIA रॉकेट पर अपना चंद्र अन्वेषण अंतरिक्ष यान लॉन्च किया, जिससे अगले साल की शुरुआत में चंद्रमा पर उतरने वाला दुनिया का 5वां देश बनने की उम्मीद है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने कहा कि रॉकेट ने योजना के...

नेशनल डेस्क:  जापान ने गुरुवार को घरेलू H-IIA रॉकेट पर अपना चंद्र अन्वेषण अंतरिक्ष यान लॉन्च किया, जिससे अगले साल की शुरुआत में चंद्रमा पर उतरने वाला दुनिया का 5वां देश बनने की उम्मीद है।  जापान ने वीरवार को एक एक्स-रे दूरबीन ले जाने वाला रॉकेट प्रक्षेपित किया, जो ब्रह्मांड की उत्पति का पता लगाएगा। जापान द्वारा प्रक्षेपित रॉकेट में दूरबीन के साथ-साथ चांद की सतह पर उतारने के लिए एक छोटा लैंडर भी भेजा गया है। दक्षिण-पश्चिमी जापान के तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से ‘एचआईआई-ए' रॉकेट के प्रक्षेपण का जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) ने सीधा प्रसारण किया।

 आकाशीय पिंड कैसे बनते हैं..अब इस राज पर से उठेगा पर्दा 
रॉकेट के प्रक्षेपण और प्रशांत क्षेत्र पर उड़ान भरने के बाद जेएएक्सए के प्रवक्ता ने कहा, ''हमने रॉकेट प्रक्षेपित कर दिया।'' प्रक्षेपण के 13 मिनट बाद रॉकेट ने एक्स-रे इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन या एक्सआरआईएसएम नाम के एक उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया, जो गति मापेगा और आकाशगंगाओं के बीच की संरचना का पता लगाएगा। जेएएक्सए ने कहा कि इससे प्राप्त होने वाली जानकारी से यह जानने में मदद मिलेगी कि आकाशीय पिंड कैसे बनते हैं और उम्मीद है कि हम उस राज पर से भी पर्दा उठा सकेंगे कि कैसे ब्रह्मांड की उत्पति हुई।

नासा के सहयोग से जेएएक्सए विभिन्न तरंग दैर्ध्य पर प्रकाश की शक्ति, अंतरिक्ष में चीजों के तापमान और उनके आकार व चमक का पता लगाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार नये जापानी रॉकेट में 'स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून' अथवा स्लिम भी भेजा गया है। इसे चंद्रमा पर उतरने वाला एक हल्का लैंडर भी कह सकते हैं। स्मार्ट लैंडर को संभवतः अगले साल की शुरुआत में चांद की सतह पर उतारने का प्रयास किया जाएगा। 

जापानी एयरोस्पेश एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) द्वारा लॉन्च किया जाने वाले मून मिशन ‘मून स्नाइपर’ में रॉकेट एक लैंडर को ले जाएगा, जिसके चार से छह महीने में चंद्रमा की सतह पर पहुंचने की उम्मीद है।

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 'जहां हम चाहते हैं वहां लैंडिंग' हासिल करना है'
JAXA के अध्यक्ष हिरोशी यामाकावा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "SLIM का बड़ा उद्देश्य उच्च-सटीकता लैंडिंग को साबित करना है...'जहां हम कर सकते हैं वहां लैंडिंग' के बजाय चंद्रमा की सतह पर 'जहां हम चाहते हैं वहां लैंडिंग' हासिल करना है।" यह लांच भारत द्वारा चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर अपने चंद्रयान-3 मिशन के साथ चंद्रमा पर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बनने के दो सप्ताह बाद हुआ है। लगभग उसी समय, रूस का लूना-25 लैंडर चंद्रमा के निकट आते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

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पिछले साल जापान द्वारा चंद्रमा पर लैंडिंग के दो पहले प्रयास विफल रहे थे। JAXA का OMOTENASHI लैंडर से संपर्क टूट गया और नवंबर में लैंडिंग का प्रयास विफल हो गया। जापानी स्टार्टअप आईस्पेस (9348.टी) द्वारा बनाया गया हकुतो-आर मिशन 1 लैंडर, अप्रैल में चंद्रमा की सतह पर उतरने का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

 

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