UN में उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका की चीन-रूस से हुई तीखी नोकझोंक

Edited By Updated: 12 May, 2022 12:28 PM

us china clash at un security council over north korea

उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका-चीन और रूस आपस में भिड़ गए।  अमेरिका की, उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु...

संयुक्त राष्ट्र: उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका-चीन और रूस आपस में भिड़ गए।  अमेरिका की, उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर उस पर संयुक्त राष्ट्र के नए प्रतिबंध लगाने के लिए जोर दिए जाने पर चीन और रूस के कड़े विरोध के चलते बुधवार को उनसे तीखी नोकझोंक हुई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में चर्चा में दोनों पक्षों के बीच काफी मतभेद देखने को मिला और बाइडेन प्रशासन के लिए नए प्रतिबंधों के प्रस्ताव को परिषद में पारित कराना लगभग असंभव कार्य बन गया। चीन और रूस दोनों के पास वीटो का अधिकार है और उन्होंने कहा कि वे उत्तर कोरिया पर नयी वार्ता देखना चाहते है न कि उसे और सजा देना चाहते हैं।

 

अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा कि सुरक्षा परिषद उत्तर कोरिया के ‘‘एक और उकसावे वाला, गैरकानूनी, खतरनाक कृत्य जैसे कि परमाणु परीक्षण'' करने तक का इंतजार नहीं कर सकती है। ग्रीनफील्ड इस महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक कोरिया गणराज्य ने इस साल अभी तक 17 बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण किए हैं। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव खालिद खैरी ने परिषद में कहा कि उत्तर कोरिया ने ‘‘दो साल पहले के मुकाबले पिछले पांच महीनों में अधिक मिसाइलों का परीक्षण किया है।'' ग्रीनफील्ड ने चीन और रूस का प्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में दो सदस्यों ने प्रतिबंध लगाने के ‘‘हर प्रयास को बाधित किया है।''

 

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2017 में पारित प्रतिबंधों के प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद ने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया अंतरमहाद्वीप तक पहुंचने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करता है तो उसे पेट्रोलियम निर्यात पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि इस साल उत्तर कोरिया ने कम से कम तीन आईसीबीएम परीक्षण किए और परिषद इस पर चुप है। अमेरिका के प्रस्तावित प्रतिबंध प्रस्ताव में अन्य प्रतिबंधों समेत तेल के निर्यात पर पाबंदी शामिल होगी।

 

वहीं, चीन के राजदूत झांग जुन ने इस पर खेद जताते हुए कहा कि अमेरिका ‘‘प्रतिबंधों की जादुई शक्ति के प्रति अंधविश्वासी बना हुआ है।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच 2018 में सीधी बातचीत के सकारात्मक नतीजे निकले थे लेकिन अमेरिका ने प्योंगयांग की सकारात्मक पहलों पर किए वादों को पूरा न करके मौजूदा गतिरोध पैदा किया है। संयुक्त राष्ट्र में रूस की उप राजदूत एना इव्स्तिगनीवा ने नए प्रतिबंधों के झांग के विरोध को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से अभी तक परिषद ने उत्तर कोरिया के सकारात्मक संकेतों को नजरअंदाज करते हुए केवल प्रतिबंध सख्त किए हैं।''  

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