Edited By Mehak,Updated: 23 Jan, 2026 02:19 PM

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी पर उन्हें याद करते हुए लिखा कि शिवसेना छोड़ने से ज्यादा दर्द उन्हें ‘मातोश्री’ और ताऊ से दूरी का था। उन्होंने बाल ठाकरे को अपने पीछे खड़े पर्वत जैसा बताया और बचपन से जुड़ी कई भावुक यादें साझा कीं।...
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा है कि शिवसेना छोड़ने के बाद पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे से पहले की तरह बार-बार मुलाकात न कर पाना उनके लिए पार्टी छोड़ने से भी ज्यादा तकलीफदेह था। राज ने अपने दिवंगत चाचा को एक ऐसे पर्वत के रूप में वर्णित किया जो उनके पीछे खड़ा रहा। बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के मौके पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र ‘सामना' में श्रद्धांजलि लेख में राज ने अपने ताऊ के साथ अपने गहरे रिश्ते को याद करते हुए कहा कि 2005 में पार्टी से अलग होने के परिणामों की तुलना में उनके लिए पारिवारिक घर ‘मातोश्री' छोड़ने का निजी दुख कहीं अधिक बड़ा था। राज ने लिखा कि 1991 में जब वह अविभाजित शिवसेना की छात्र इकाई के प्रमुख थे और काला घोड़ा में इसने मोर्चा निकाला था, तब बाल ठाकरे ने सार्वजनिक लैंडलाइन फोन के जरिए उनका भाषण सुना था।
मनसे प्रमुख ने इस बात का भी जिक्र किया कि बचपन में एक बार वह जल गए थे तब उनके ताऊ ने दो महीने तक उनके घावों पर एंटीसेप्टिक लगाकर उन्हें साफ किया था और दो महीने तक उनकी देखभाल की थी। राज ने अपने लेख में लिखा, ‘‘जब मैंने (अविभाजित शिवसेना से) अलग होने का फैसला किया, तो एक बात मुझे खूब परेशान करती थी कि मैं पहले की तरह अपने लोगों से बार-बार नहीं मिल पाऊंगा। मैंने अपने पिता को खो दिया था और अब मैं अपने ताऊ से भी दूर जा रहा था। यह विचार मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। पार्टी छोड़ने से ज्यादा, घर (मातोश्री) छोड़ना ज्यादा तकलीफदेह था।''

राज ने बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए अविभाजित शिवसेना 2005 में छोड़ दी थी और एक साल बाद मनसे का गठन किया था। उन्होंने लिखा, ‘‘मेरे ताऊ बालासाहेब केशव ठाकरे का मेरे बचपन और युवावस्था पर गहरा असर था। वह मेरे पीछे पर्वत की तरह खड़े रहे।'' उन्होंने बताया कि एक बार जब उनका वाहन एक ट्रक से टकराते-टकराते बचा था, तब बाल ठाकरे ने फोन करके उनका हालचाल पूछा था। अपने ताऊ से जुड़ी यादें साझा करते हुए राज ने कहा कि बाल ठाकरे पाकिस्तान के विरोधी थे लेकिन उन्होंने मेहदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि जब शहर में अविभाजित शिवसेना और कम्युनिस्ट कट्टर प्रतिद्वंद्वी थे तब अभिनेता-फिल्मकार राज कपूर ने शिवसेना प्रमुख से 1970 में बनी फिल्म 'मेरा नाम जोकर' के उन हिस्सों के बारे में सुझाव मांगा था जिन्हें संपादित करने की आवश्यकता थी।

राज ने लिखा कि बाल ठाकरे उस फिल्म को साम्यवाद समर्थक मानते थे। राज ने कहा कि अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ ने बाल ठाकरे से मुलाकात की थी जिसके बाद उन्होंने ‘बोफोर्स' घोटाले के दौरान अमिताभ बच्चन और अजिताभ के खिलाफ नकारात्मक प्रचार की समस्या से निपटने में भी मदद की थी। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना संस्थापक ने बच्चन को तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह को पत्र लिखने का सुझाव दिया था और उस पत्र से नकारात्मक चर्चा थमने में मदद मिली।