Edited By Mehak,Updated: 04 Feb, 2026 12:16 PM

बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनकी कथित आखिरी फोन कॉल चर्चा में है। दावा है कि हादसे से पहले उन्होंने विमान में बैठकर अपने भतीजे से बातचीत की थी, जिसमें जिला परिषद चुनाव और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात...
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार, 28 जनवरी को हुए विमान हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार का निधन हो गया। यह घटना न सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। अजित पवार उस समय कई अहम राजनीतिक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, जिनमें आगामी महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करना भी शामिल था।
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे अजित पवार की आखिरी फोन कॉल बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह बातचीत उन्होंने विमान में सवार होने के बाद अपने भतीजे श्रीजीत पवार से की थी। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में काफी चर्चा हो रही है।
वायरल ऑडियो में क्या दावा किया जा रहा है
वायरल ऑडियो को लेकर कहा जा रहा है कि अजित पवार ने बातचीत के दौरान जिला परिषद चुनाव और पार्टी की रणनीति पर चर्चा की थी। कथित तौर पर उन्होंने यह साफ कहा कि उनकी राजनीति का आधार सभी जाति, वर्ग और समुदायों को साथ लेकर चलना है। उन्होंने अपने भतीजे से यह भी कहा कि पार्टी में फैसले समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
इस बातचीत में अजित पवार एक वरिष्ठ नेता दिगंबर दुर्गाडे का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि किस तरह उन्होंने माली समाज से आने वाले व्यक्ति को जिला बैंक का चेयरमैन बनाया। इसके जरिए वह यह संदेश देते नजर आते हैं कि उनकी सोच हमेशा समावेशी रही है और उन्होंने पदों पर नियुक्ति में जाति या धर्म के बजाय योग्यता और सामाजिक संतुलन को महत्व दिया।
अंतिम समय तक अपनी सोच पर अडिग
इस कथित बातचीत से यह संकेत मिलता है कि अजित पवार अंतिम क्षणों तक अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संतुलन को लेकर पूरी तरह सजग थे। समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की उनकी प्रतिबद्धता आखिरी समय तक बनी रही। उनके करीबी नेताओं का कहना है कि अजित पवार हमेशा जमीनी राजनीति में विश्वास रखते थे और यही उनकी पहचान थी।
हालांकि वायरल ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यदि यह दावा सही है तो यह साफ दिखाता है कि अजित पवार अपने अंतिम पलों में भी सत्ता या पद से ज्यादा समाज और संगठन के भविष्य को लेकर चिंतित थे। यही कारण है कि उनके निधन के बाद समर्थक उन्हें एक दृढ़ संकल्प वाले और समावेशी सोच के नेता के रूप में याद कर रहे हैं।