EPFO कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका, PF पर मिलने वाला ब्याज हो सकता है कम

Edited By Updated: 04 Feb, 2026 07:43 PM

big blow for epfo  employees interest on pf may be reduced

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) मार्च के पहले सप्ताह में होने वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में 2025-26 के लिए पीएफ ब्याज दर पर फैसला कर सकता है। मौजूदा 8.25 फीसदी दर में मामूली कटौती की संभावना है, हालांकि चुनावी कारणों से यथास्थिति भी...

नेशनल डेस्कः कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक मार्च के पहले सप्ताह में होने जा रही है। इस अहम बैठक में 2025-26 के लिए भविष्य निधि जमा पर मिलने वाली ब्याज दर को लेकर फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ईपीएफओ मौजूदा 8.25 प्रतिशत की दर में मामूली कटौती कर इसे 8 से 8.20 प्रतिशत के दायरे में तय करने पर विचार कर रहा है, ताकि फंड पर बढ़ते वित्तीय दबाव को संतुलित किया जा सके।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक स्तर पर दबाव भी बना हुआ है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र संभावना जताई जा रही है कि ईपीएफओ लगातार तीसरे साल भी ब्याज दर में कोई बदलाव न करते हुए मौजूदा स्थिति को बरकरार रख सकता है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सभी संभावनाओं पर चर्चा जारी है। विकसित भारत एम्प्लॉयमेंट स्कीम के तहत ईपीएफओ में नए सब्सक्राइबर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य की देनदारियों को ध्यान में रखते हुए ब्याज दर में हल्की कटौती कर फाइनेंशियल बफर बनाए रखने का विकल्प भी टेबल पर है। सीबीटी की मंजूरी के बाद प्रस्तावित ब्याज दर को पहले वित्त मंत्रालय की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। उम्मीद है कि इस साल के मध्य तक ब्याज की राशि सब्सक्राइबर्स के खातों में क्रेडिट कर दी जाएगी।

सैलरी लिमिट बढ़ाने पर भी नजर

इसी बीच, ईपीएफओ की फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी (FIAC) फरवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक करेगी। इसमें चालू वित्त वर्ष में निवेश से प्राप्त रिटर्न के आधार पर ब्याज दर की सिफारिश तैयार की जाएगी, जिसे सीबीटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके अलावा, बोर्ड के सामने पीएफ कवरेज के दायरे को बढ़ाने के लिए वेतन सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी आ सकता है। मौजूदा समय में अनिवार्य पीएफ कवरेज की सैलरी लिमिट 15,000 रुपये प्रति माह है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, सीबीटी बैठक का एजेंडा अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि चार महीने के भीतर वेतन सीमा बढ़ाने पर फैसला लिया जाए। अदालत ने कहा था कि महंगाई और वेतन वृद्धि के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अनिवार्य पीएफ दायरे से बाहर हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि 15,000 रुपये की वेतन सीमा वर्ष 2014 से अब तक नहीं बदली गई है, जबकि इस अवधि में लो और मिड-स्किल कर्मचारियों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 


 

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