1 अप्रैल से बदलने जा रहा ये नियम, तुरंत पढ़ें ये जरूरी खबर

Edited By Updated: 04 Feb, 2026 09:30 PM

this rule is going to change from april 1st

नए इनकम टैक्स कानून को लेकर करदाताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या नया टैक्स ईयर सिस्टम मौजूदा असेसमेंट ईयर से टकराएगा। खासकर उस दौर में, जब पुराना और नया कानून साथ-साथ लागू होगा। सरकार ने अब इस पर पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों...

नेशनल डेस्क : नए इनकम टैक्स कानून को लेकर करदाताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या नया टैक्स ईयर सिस्टम मौजूदा असेसमेंट ईयर से टकराएगा। खासकर उस दौर में, जब पुराना और नया कानून साथ-साथ लागू होगा। सरकार ने अब इस पर पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं और इनके बीच किसी तरह का ओवरलैप नहीं होगा।

सरकार के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 का संबंध केवल वित्त वर्ष 2025-26 की आय से रहेगा। इसका मतलब साफ है- टैक्स उसी आय पर लगेगा, जो उस अवधि में कमाई गई है, न कि उस साल पर जब उसका आकलन किया जा रहा है।

नया कानून किस आय पर लागू होगा?

सरकार की ओर से जारी FAQ में बताया गया है कि नया इनकम टैक्स कानून टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होगा, और यह वित्त वर्ष 2026-27 की आय पर ही टैक्स तय करेगा। यानी पुरानी और नई व्यवस्था की आय की अवधि अलग-अलग होगी, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी।

बदलाव की प्रक्रिया कैसे चलेगी?

सरकार ने ट्रांजिशन को बेहद सरल तरीके से समझाया है।

  • वित्त वर्ष 2025-26 की आय का असेसमेंट पुराने कानून के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 में होगा।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की आय का असेसमेंट नए कानून के तहत टैक्स ईयर 2026-27 में किया जाएगा।

भले ही दोनों का असेसमेंट एक ही कैलेंडर वर्ष में हो, लेकिन नियम और आय की समय-सीमा अलग-अलग रहेंगी।

टैक्स ईयर क्या है और क्यों लाया गया?

नए कानून में पिछला वर्ष (Previous Year) की जगह टैक्स ईयर शब्द का इस्तेमाल किया गया है। टैक्स ईयर का मतलब 12 महीने की वह अवधि है, जो एक वित्त वर्ष के भीतर आती है। अब आय, टैक्स दर और असेसमेंट- तीनों को एक ही टैक्स ईयर से जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि पहले अलग-अलग शब्दों की वजह से करदाताओं को भ्रम होता था, जिसे यह नया सिस्टम खत्म करेगा। हालांकि, वित्त वर्ष की अवधारणा खत्म नहीं की गई है। रिटर्न दाखिल करने की तारीखें और अन्य प्रक्रियाएं अब भी वित्त वर्ष के आधार पर ही तय होंगी।

क्या टैक्स ईयर पूरा साल का होना जरूरी है?

जरूरी नहीं। अगर कोई व्यक्ति साल के बीच में नया बिज़नेस शुरू करता है या नई आय का स्रोत बनता है, तो उस स्थिति में टैक्स ईयर छोटा भी हो सकता है। ऐसे मामलों में टैक्स ईयर शुरुआत की तारीख से 31 मार्च तक माना जाएगा।

करदाताओं के लिए राहत की बात

सरल भाषा में समझें तो 31 मार्च 2026 तक की आय पर पुराना कानून लागू रहेगा, जबकि 1 अप्रैल 2026 के बाद कमाई गई आय पर नया कानून लागू होगा।
न तो डबल टैक्स लगेगा और न ही पुरानी आय पर नए नियम थोपे जाएंगे। सरकार का साफ संदेश है कि यह बदलाव टैक्स सिस्टम को आसान बनाने के लिए है, न कि करदाताओं को परेशान करने के लिए।

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