5 हजार में डिग्री, 100 से ज्यादा कोर्स…फर्जी यूनिवर्सिटी चलाने वाला डायरेक्टर गिरफ्तार

Edited By Updated: 08 Jan, 2026 11:00 PM

director running a fake university arrested

राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए नकली डिग्री का एक बड़ा और खतरनाक नेटवर्क सामने आया है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एक निजी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है।

नेशनल डेस्कः राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए नकली डिग्री का एक बड़ा और खतरनाक नेटवर्क सामने आया है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एक निजी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क के जरिए फायर टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन, पटवारी और यहां तक कि भारतीय नौसेना की तकनीकी भर्तियों में भी फर्जी डिग्रियों के सहारे नौकरियां हासिल की जा रही थीं।

जांच में सामने आया है कि इस फर्जी डिग्री रैकेट से अब तक 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हो चुकी है।

चेन्नई से चल रहा था पूरा फर्जी डिग्री नेटवर्क

SOG ने चेन्नई से मायसन उर्फ अरुण मायसन को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को भारत सेवक समाज (BSS) यूनिवर्सिटी का डायरेक्टर बताता था। SOG को इनपुट मिला था कि हाल ही में हुई भारतीय नौसेना की फायरमैन भर्ती परीक्षा में इस संस्थान की फर्जी डिग्रियों के आधार पर कई उम्मीदवार शामिल हुए हैं।

इसके बाद SOG की दो टीमों ने चेन्नई में छापा मारा और पूरा फर्जी नेटवर्क सामने आ गया।

बिना UGC मान्यता चल रहे थे 100 से ज्यादा कोर्स

जांच में पता चला कि आरोपी बिना UGC की मान्यता के पिछले कई सालों से 100 से अधिक प्रोफेशनल कोर्स चला रहा था।
इनमें शामिल थे: फायर टेक्नीशियन,लाइब्रेरियन, डिप्लोमा और अन्य तकनीकी कोर्स। हर डिग्री की कीमत 15 हजार से 50 हजार रुपये तय थी।

व्हाट्सएप पर चलता था पूरा खेल

इस फर्जीवाड़े का पूरा काम व्हाट्सएप के जरिए होता था।
तरीका बेहद आसान था:

  • ग्राहक से डिग्री का ऑर्डर लिया जाता

  • कुछ ही दिनों में फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किया जाता

  • फिर उसे कूरियर से राजस्थान और अन्य राज्यों में भेज दिया जाता

1952 से डिग्रियां, लेकिन असल में नौकरी दिलाने का अड्डा

भारत सेवक समाज की शुरुआत 1902 में हुई थी और 1952 से डिग्रियां दी जा रही थीं। लेकिन समय के साथ यह संस्था शिक्षा केंद्र नहीं रही, बल्कि सरकारी नौकरी दिलाने का कारखाना बन गई। पटवारी भर्ती परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के मोबाइल से जब इस यूनिवर्सिटी का फर्जी सर्टिफिकेट मिला, तभी SOG को पहला सुराग मिला और पूरा रैकेट धीरे-धीरे उजागर होता चला गया।

2–3 दिन में बन जाती थी डिग्री

जांच में यह भी सामने आया कि सिर्फ 12वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड लेकर 2 से 3 दिन में फायर टेक्नीशियन कोर्स की मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते थे। ये सर्टिफिकेट जुलाई 2025 की तारीख में जारी दिखाए गए। हैरानी की बात यह है कि न कोई ट्रेनिंग सेंटर, न कोई लैब और न कोई इंफ्रास्ट्रक्चर, सिर्फ एक ऑफिस के दम पर देशभर में हजारों फर्जी डिग्रियां बांटी जा रही थीं।

हजारों सरकारी कर्मचारी SOG के रडार पर

डायरेक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब बैकडेट में डिग्री लेकर सरकारी नौकरी पाने वाले हजारों कर्मचारी SOG की जांच के दायरे में आ गए हैं। सिर्फ जयपुर में ही 7,000 से ज्यादा इंस्टीट्यूट्स की भूमिका की जांच चल रही है।

खुद को योजना आयोग से मान्यता प्राप्त बताता था संस्थान

भारत सेवक समाज दावा करता रहा कि उसे योजना आयोग, भारत सरकार से मान्यता मिली है और वह स्किल डेवलपमेंट कोर्स चला रहा है। लेकिन जांच में साफ हो गया कि योजना आयोग ने कभी कोई मान्यता नहीं दी। यूनिवर्सिटी बिना किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन और मान्यता के चल रही थी।

चेयरमैन के खिलाफ वारंट, जांच जारी

इस मामले में भारत सेवक समाज के चेयरमैन बी.एस. बालचंद्रन के खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं और अन्य आरोपियों की तलाश और जांच जारी है। SOG की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में राजस्थान की कई बड़ी भर्तियों पर सवाल खड़े कर सकती है।
फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी पाने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

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