Edited By Pardeep,Updated: 05 Mar, 2026 06:32 AM

अमेरिका-इजरायल के हमलों में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक मशहद में दफनाने की तैयारी की जा रही है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के हवाले से AFP ने बताया है कि खामेनेई को उनके...
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका-इजरायल के हमलों में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक मशहद में दफनाने की तैयारी की जा रही है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के हवाले से AFP ने बताया है कि खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
मशहद ईरान के उत्तर-पूर्व में स्थित शहर है और शिया मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इसी शहर में खामेनेई का जन्म हुआ था। उनके पिता को भी यहां स्थित इमाम रज़ा दरगाह के परिसर में दफनाया गया था।
36 साल तक किया ईरान का नेतृत्व
86 साल के खामेनेई पिछले 36 वर्षों से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की घोषणा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की थी, जिसके बाद ईरानी सरकार ने भी इसकी पुष्टि की। खामेनेई को दफनाने से पहले राजधानी तेहरान में एक बड़ा विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने टेलीग्राम अकाउंट के जरिए बताया कि तेहरान में उनके सम्मान में एक “भव्य विदाई समारोह” होगा।
कब शुरू होगी अंतिम संस्कार प्रक्रिया?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी समय के अनुसार आज रात 10 बजे खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी। तेहरान में स्थित इमाम खुमैनी मस्जिद में तीन दिन तक श्रद्धांजलि और विदाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा। हालांकि सुपुर्द-ए-खाक किए जाने का अंतिम कार्यक्रम और समय अभी औपचारिक रूप से घोषित किया जाना बाकी है।
मशहद क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और इसे देश का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित इमाम रज़ा की दरगाह शिया इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जहां हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
ईरान की राजनीति में खामेनेई का प्रभाव
अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले सर्वोच्च नेता थे। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे देश के केवल दूसरे सुप्रीम लीडर बने। इस पद पर रहते हुए उनके पास रक्षा, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मामलों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार था। तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पर मजबूत पकड़ बनाए रखी और पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में देश का प्रभाव बढ़ाया।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
इस बीच मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक इस संघर्ष में 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ईरान अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है और मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों को निशाना बना रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।