Edited By Tanuja,Updated: 17 Jan, 2026 03:12 PM

वैश्विक अनिश्चितताओं, यूक्रेन युद्ध और अमेरिका पर घटती निर्भरता के बीच यूरोपीय संघ भारत को अपने “चौथे रणनीतिक स्तंभ” के रूप में देख रहा है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव के अनुसार, भारत-EU संबंध अब केवल FTA तक सीमित नहीं रहे।
Washington: यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा को केवल भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े रणनीतिक संकेत के रूप में माना जा रहा है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव के अनुसार, यह दौरा वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका के साथ यूरोप के रिश्तों में बढ़ती अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में बेहद अहम है। बातचीत में सचदेव ने कहा कि यूरोप इस समय अमेरिका, रूस और चीन तीनों के दबाव का सामना कर रहा है।
यूक्रेन युद्ध, रूस पर प्रतिबंधों और रूसी गैस की आपूर्ति बंद होने से यूरोप की रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं, चीन यूरोप की उदारवादी सोच से वैचारिक रूप से अलग होने के बावजूद अब भी उसकी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बना हुआ है। ऐसे में यूरोपीय संघ भारत को अपनी भू-राजनीतिक और आर्थिक रणनीति का “चौथा स्तंभ” मानने लगा है। सचदेव के मुताबिक, EU को दीर्घकालिक स्थिरता, भरोसेमंद साझेदार और विविधीकृत व्यापार ढांचे की जरूरत है, और भारत एक बड़ा, उभरता हुआ तथा रणनीतिक स्वायत्तता वाला देश होने के कारण इस भूमिका में फिट बैठता है।
उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ FTA नहीं है। भारत के लिए 20 ट्रिलियन डॉलर की EU अर्थव्यवस्था तक पहुंच महत्वपूर्ण है, जबकि यूरोप के लिए भारत एक ऐसा बाजार है जो चीन पर निर्भरता कम कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जहां भारत ने हमेशा संतुलित विदेश नीति अपनाई है, वहीं यूरोप अब अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। सचदेव ने ईरान और वेनेजुएला जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और पारंपरिक गठबंधन कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में भारत-EU संबंध नई वैश्विक व्यवस्था में विशेष रणनीतिक महत्व हासिल कर रहे हैं।