Edited By Mehak,Updated: 10 Feb, 2026 06:35 PM

सरकार नौकरीपेशा लोगों के लिए HRA (हाउस रेंट अलाउंस) टैक्स छूट के नियम बदलने की योजना बना रही है। वर्तमान में केवल मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में 50% HRA छूट मिलती है, जबकि अन्य शहरों में 40%। प्रस्ताव के अनुसार बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और...
नेशनल डेस्क : देश के बड़े शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार जल्द ही एक बड़ी राहत का ऐलान कर सकती है। केंद्र सरकार House Rent Allowance (HRA) पर मिलने वाले टैक्स छूट के नियमों में बदलाव करने की योजना बना रही है। मकान किराए लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए सरकार अब कुछ नए शहरों को भी ज्यादा HRA छूट वाले दायरे में शामिल करने पर विचार कर रही है।
क्या है वर्तमान नियम?
वर्तमान में HRA पर टैक्स छूट सिर्फ चार मेट्रो शहरों – मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई तक ही सीमित है। इन शहरों में नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बेसिक सैलरी और डीए का 50 प्रतिशत HRA छूट के रूप में मिलता है, जबकि अन्य शहरों में यह 40 प्रतिशत होती है। HRA टैक्स छूट तय करने के लिए तीन आंकड़ों की तुलना की जाती है:
- कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक HRA
- मेट्रो या अन्य शहरों के लिए बेसिक सैलरी और डीए का तय प्रतिशत (मेट्रो में 50%, अन्य में 40%)।
- कर्मचारियों द्वारा चुकाए गए किराए में से बेसिक सैलरी और डीए का 10 प्रतिशत घटाकर बची रकम।
इन तीनों में से जो सबसे कम होता है, वही टैक्स छूट के लिए माना जाता है।
किन शहरों को शामिल करने का प्रस्ताव है?
सरकार के ड्राफ्ट प्रस्ताव में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को 50 प्रतिशत छूट वाले शहरों में शामिल करने की बात कही गई है। अगर यह लागू हो जाता है, तो इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को ज्यादा HRA टैक्स छूट का लाभ मिलेगा और ये शहर टैक्स राहत के मामले में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसी श्रेणी में आ जाएंगे।
कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव से महंगे शहरों में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए टैक्स में राहत मिलेगी। उन्हें अपने HRA पर अधिक छूट मिलेगी, जिससे उनकी इनकम टैक्स की देनदारी कम होगी। खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह बड़ा फायदा होगा जो बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद या अहमदाबाद जैसे शहरों में काम करते हैं, क्योंकि इन शहरों में मकान किराए की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट में
सरकार ने यह बदलाव अभी ड्राफ्ट के रूप में पेश किया है। इस पर सुझाव और आपत्तियां आम जनता और संबंधित पक्षों से मांगी जाएंगी। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। अगर नियम लागू हो जाते हैं, तो देश के महंगे शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को HRA टैक्स में महत्वपूर्ण राहत मिलने की उम्मीद है।