Union Budget 2026: बजट से पहले मोदी सरकार पर खरगे का बड़ा आरोप, बोले– अर्थव्यवस्था ‘पटरी से उतरी’

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 11:33 PM

kharge slams modi govt ahead of budget 2026

केंद्रीय बजट 2026-27 से ठीक एक दिन पहले सियासत गरमा गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जहां रविवार (1 फरवरी 2026) को संसद में बजट पेश करने वाली हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बजट से पहले ही मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल दिया है।

नेशनल डेस्क: केंद्रीय बजट 2026-27 से ठीक एक दिन पहले सियासत गरमा गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जहां रविवार (1 फरवरी 2026) को संसद में बजट पेश करने वाली हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बजट से पहले ही मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल दिया है। खरगे ने साफ कहा कि अब सरकार के पास ‘विरासत’ का बहाना नहीं बचा है और देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि 12 साल से सत्ता में रहने के बावजूद अगर हालात ऐसे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी मौजूदा सरकार की है, न कि पिछली सरकारों की।

“अब विरासत नहीं, अपनी नाकामी का हिसाब दें” – खरगे

शनिवार (31 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया पर जारी बयान में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी सरकार हर आर्थिक विफलता के लिए अब तक पूर्ववर्ती सरकारों को दोष देती रही है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद यह तर्क पूरी तरह खोखला हो चुका है।

खरगे ने सवाल उठाया कि क्या आने वाला बजट उन आर्थिक मोर्चों पर ठोस समाधान देगा, जहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गिरते आंकड़े सरकार की “अपनी विरासत” को उजागर कर रहे हैं।

शेयर किए गए वीडियो में गिनाईं अर्थव्यवस्था की कमजोर कड़ियां

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें सरकारी आंकड़ों और आर्थिक सर्वे के आधार पर कई अहम दावे किए गए। वीडियो में बताया गया कि यूपीए शासन के दौरान जहां विनिर्माण क्षेत्र की औसत वृद्धि 7.4 प्रतिशत थी, वहीं एनडीए काल में यह घटकर करीब 3.5 प्रतिशत रह गई है।

इसके अलावा ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को लेकर भी सवाल उठाए गए। दावा किया गया कि विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 13 प्रतिशत के आसपास ही अटका हुआ है, जबकि इसे 25 प्रतिशत तक ले जाने का वादा किया गया था।

रोजगार, महंगाई और रुपये पर भी हमला

खरगे ने रोजगार संकट को लेकर कहा कि आज स्थिति यह है कि हर दो स्नातकों में से केवल एक को ही नौकरी मिल पा रही है। वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई है।

उन्होंने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खाद्य महंगाई ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है। घरेलू बचत दर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही रुपये के डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से कमजोर होने और विदेशी निवेश में लगातार गिरावट को लेकर भी सरकार को घेरा गया।

12वां बजट, लेकिन उम्मीदों का भारी बोझ

यह मोदी सरकार का 12वां केंद्रीय बजट होगा। कांग्रेस का दावा है कि अब सरकार को आंकड़ों और सच्चाई के आधार पर जवाब देना होगा। बजट से पहले उठे इन सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बजट 2026 में सरकार विपक्ष के इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है।

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