‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर BJP का उमर अब्‍दुल्‍ला पर पलटवार, कहा- इनके पिता ने हिंदुओं को मरने के लिए छोड़ दिया

Edited By Updated: 19 Mar, 2022 01:17 PM

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा ''द कश्मीर फाइल्स'' को झूठ का पुलिंदा बताए जाने के बाद भाजपा ने अब पलटवार किया है। भाजपा नेता और पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने जम्मू-कश्मीर...

नेशनल डेस्क: नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा 'द कश्मीर फाइल्स' को झूठ का पुलिंदा बताए जाने के बाद भाजपा ने अब पलटवार किया है। भाजपा नेता और पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर टिप्पणी की है।

उन्‍होंने उमर अब्‍दुल्‍ला के बयान पर ट्वीट के जर‍िए जवाब द‍िया और कहा, ‘उमर को ‘कश्मीर फाइल्स’ का कौन सा हिस्सा झूठ लगता है। फैक्‍ट यह है कि उनके पिता फारूक अब्‍दुल्‍ला ने 18 जनवरी 1990 को सीएम के रूप में इस्तीफा दे दिया था और 19 जनवरी 1990 से असहाय कश्मीरी हिंदुओं पर नरसंहार शुरू किया गया। उन्होंने 70 आईएसआई प्रशिक्षित खूंखार आतंकवादियों की रिहाई का आदेश दिया था। उन्‍होंने कहा कि उनके प‍िता फारूक अब्‍दुल्‍ला ने कायरों की तरह ह‍िंदुओं को छोड़ द‍िया था।

उन्‍होंने यह बात उमर अब्‍दुल्‍ला के उस बयान के जवाब में कही, जिसमें उन्‍होंने कहा था ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म सच से बहुत दूर है। मालवीय ने कहा, '1984 में इंदिरा गांधी ने जगमोहन दास को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया था। जुलाई 1989 में अपने इस्तीफे से पहले उन्होंने राजीव गांधी को घाटी में पनपते आतंकवाद को लेकर सावधान किया था।'उन्होंने आगे कहा, राजीव गांधी ने जगमोहन को लोकसभा की टिकट ऑफर किया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें 20 जनवरी को दोबारा जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बना दिया गया। 22 जनवरी को वह श्रीनगर पहुंचे। तब तक वहां जिहाद शुरू हो चुका था।

सत्य से बहुत दूर है 'द कश्मीर फाइल्स': उमर अब्दुल्ला 
आपको बतां दें कि नेशनल कॉफ्रेंस ने शुक्रवार को फिल्म ''द कश्मीर फाइल्स'' पर अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि फिल्म सच से बहुत दूर है क्योंकि फिल्म निर्माताओं ने आतंकवाद से पीड़ित मुसलमानों और सिखों के संघर्ष को नजरअंदाज किया है। पार्टी के उपाध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर ''द कश्मीर फाइल्स'' एक व्यावसायिक फिल्म होती, तो किसी को कोई समस्या नहीं थी लेकिन अगर फिल्म निर्माता दावा करते हैं कि यह वास्तविकता पर आधारित है, तो सच्चाई इससे अलग है। अब्दुल्ला ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के दमाल हांजीपोरा में संवाददाताओं से कहा, ''जब कश्मीरी पंडितों के पलायन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, तब फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री नहीं थे। जगमोहन राज्यपाल थे।

केंद्र में वी पी सिंह की सरकार थी, जिसे भाजपा ने बाहर से समर्थन दिया हुआ था।'' उमर ने आश्चर्य जताया कि इस तथ्य को फिल्म से दूर क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा, ''सच्चाई को तोड़े-मरोड़े नहीं। यह सही चीज नहीं है।'' उमर ने कहा, ''अगर कश्मीरी पंडित आतंकवाद के शिकार हुए हैं तो हमें इसके लिए बेहद खेद है। हालांकि, हमें उन मुसलमानों और सिखों के संघर्ष को भी नहीं भूलना चाहिए, जिन्हें उसी बंदूक से निशाना बनाया गया था।'' उमर ने कहा कि बहुसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों का अभी वापस आना बाकी है। उन्होंने कहा, ''आज एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां हम उन सभी को वापस ला सकें, जिन्होंने अपना घर छोड़ दिया था।''

 पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए माहौल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, ''हालांकि, मुझे नहीं लगता कि जिन लोगों ने यह फिल्म बनायी है, वे उन्हें (कश्मीरी पंडितों को) वापस लौटने देना चाहते हैं। इस फिल्म के जरिए, वे चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित हमेशा बाहर ही रहें।'' बाद में उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, ''वर्ष 1990 और उसके बाद के दर्द और परेशानियों को बदला नहीं जा सकता। जिस तरह से कश्मीरी पंडितों से सुरक्षा की भावना छीन ली गई थी और उन्हें घाटी छोड़कर जाना पड़ा था, वो हमारी कश्मीरी परंपरा पर धब्बा है। हमे विभाजन को बढ़ाने नहीं बल्कि दूर करने के रास्ते तलाशने होंगे।'' इस बीच, एक कश्मीरी पंडित द्वारा ट्विटर पर इस मसले पर लंबी चुप्पी को लेकर उठाए गए सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने याद दिलाते हुए कहा, '' मुख्यमंत्री होने के दौरान भी और पद से हटने के बाद भी, मैं पिछले कई वर्षों से इस बात को बोल रहा हूं। शायद, जो मैं तब से बोल रहा हूं, उस पर आप ध्यान नहीं दे रहे। 1990 के बाद से जो हुआ, मैं उसका पता लगाने के लिए लंबे समय से सुलह आयोग और सत्य सामने लाने की वकालत कर रहा हूं।'' 

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