BJP को देखकर RSS का निष्कर्ष निकालना गलत होगा: संघ प्रमुख मोहन भागवत

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 01:16 PM

it would be wrong to draw conclusions about rss by looking at bjp mohan bhagwat

RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने साफ किया है कि संघ की पहचान को किसी राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित करना एक बड़ी भूल है। भोपाल में 'प्रबुद्धजन गोष्ठी' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है और इसे केवल भाजपा या विद्या भारती...

नेशनल डेस्क: RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने साफ किया है कि संघ की पहचान को किसी राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित करना एक बड़ी भूल है। भोपाल में 'प्रबुद्धजन गोष्ठी' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है और इसे केवल भाजपा या विद्या भारती के नजरिए से नहीं समझा जा सकता।

भागवत ने कहा- हम अर्धसैनिक बल नहीं, समाज के संस्कार केंद्र हैं

भागवत ने कहा कि संघ में वर्दी (गणवेश), दंड अभ्यास और शारीरिक कसरत देखकर अक्सर लोग इसे 'पैरामिलिट्री' मान लेते हैं, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। उन्होंने कहा, "संघ का मुख्य कार्य समाज को एकजुट करना और नागरिकों में वह सद्गुण विकसित करना है जिससे भारत कभी दोबारा गुलाम न हो। हम किसी प्रतिक्रिया या विरोध के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक समाज निर्माण के लिए बने हैं।"

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भाजपा और विकिपीडिया पर टिप्पणी

सरसंघचालक ने दो प्रमुख भ्रांतियों पर प्रहार किया:

  • भाजपा से तुलना: उन्होंने साफ कहा, "अगर आप भाजपा को देखकर संघ का निष्कर्ष निकाल रहे हैं, तो यह बहुत बड़ी गलती है। संघ एक स्वतंत्र वैचारिक मूल संगठन है।"

  • सतही जानकारी: आजकल लोग गहरी जानकारी के लिए मूल स्रोतों तक जाने के बजाय 'विकिपीडिया' का सहारा लेते हैं। भागवत के अनुसार डिजिटल मंचों पर दी गई जानकारी हमेशा सही नहीं होती।

इतिहास से सीख और शताब्दी वर्ष का संकल्प

संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर भागवत ने भारत के पराजयों के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर विदेशी आक्रमणकारी हमें बार-बार इसलिए हरा पाए क्योंकि हम भीतर से बंटे हुए थे। "अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। हमें यह सोचना होगा कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ? आजादी की गारंटी केवल एकजुट और स्वाभिमान से भरा समाज ही दे सकता है।"

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चीनी कितनी मीठी है, यह चखकर ही पता चलेगा

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने लोगों को 'शाखा' आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा, "अगर मैं दो घंटे तक यह समझाऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तो आप पूरी तरह नहीं समझ पाएंगे। बेहतर है कि आप एक चम्मच चीनी खुद चख लें। संघ को समझना है तो उसके भीतर आकर देखिए।"

 

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