Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Jan, 2026 12:49 PM

दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरियां अब सिमटने वाली हैं। जिस सफर में कभी आधा दिन लग जाता था, वह अब एक फिल्म देखने जितनी देर में पूरा हो जाएगा। बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। 13 जनवरी 2026 की ताजा जानकारी...
नेशनल डेस्क: दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरियां अब सिमटने वाली हैं। जिस सफर में कभी आधा दिन लग जाता था, वह अब एक फिल्म देखने जितनी देर में पूरा हो जाएगा। बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। 13 जनवरी 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य लगभग 99% संपन्न हो चुका है और अगले 10 दिनों में फिनिशिंग का काम भी निपट जाएगा।
कब कटेगा फीता? (उद्घाटन की संभावित तारीख)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आधुनिक एक्सप्रेसवे को राष्ट्र को समर्पित कर सकते हैं। इसकी आधिकारिक शुरुआत फरवरी 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह (7 फरवरी के आसपास) में होने की पूरी उम्मीद है। वर्तमान में अक्षरधाम से बागपत के बीच ट्रायल चल रहा है और महीने के अंत तक पूरे रूट पर गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी।
सफर होगा सुपरफास्ट: Speed और Time
दूरी: करीब 213 किलोमीटर।
समय: मात्र 2.5 से 3 घंटे (पहले 6-7 घंटे लगते थे)।
रफ्तार: कारों के लिए 100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी/घंटा की सीमा तय की गई है।
जेब पर कितना पड़ेगा असर? (टोल का गणित)
एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए दो तरह की भुगतान व्यवस्था हो सकती है:
फास्टैग/सालाना पास धारक: चारों टोल प्लाजा के लिए एकतरफा सफर का खर्च लगभग 60 रुपये के करीब रहने का अनुमान है।
सामान्य यात्री: बिना पास वाले यात्रियों के लिए यह शुल्क 500 रुपये तक जा सकता है। राहत की बात यह है कि अक्षरधाम से लोनी/खेकड़ा के शुरुआती हिस्से को कुछ समय के लिए नि:शुल्क रखा जा सकता है।
रूट मैप: 4 चरणों में सुगम सफर
यह कॉरिडोर चार मुख्य हिस्सों में बंटा है:
पहला चरण: अक्षरधाम से बागपत (32 किमी) - यह मुख्य रूप से एलिवेटेड रोड है।
दूसरा चरण: बागपत से सहारनपुर (120 किमी) - यह पूरी तरह नया 'ग्रीनफील्ड' रास्ता है।
तीसरा चरण: सहारनपुर से गणेशपुर (40 किमी)।
चौथा चरण: गणेशपुर से देहरादून (20 किमी) - यहाँ 12 किमी लंबा एशिया का सबसे विशाल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर और राजाजी नेशनल पार्क के पास 340 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है।
खासियत जो इसे बनाती है बेमिसाल
पर्यावरण और वन्यजीव: इको-सेंसिटिव जोन में विशेष लाइटिंग लगाई गई है ताकि जंगली जानवरों को सड़क के नीचे से गुजरने में दिक्कत न हो।
यात्री सुविधाएं: पूरे मार्ग पर अत्याधुनिक 'वे-साइड एमेनिटीज' विकसित की गई हैं, जहाँ यात्रियों के लिए आराम, खान-पान और शौचालय की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी।