Edited By Parveen Kumar,Updated: 28 Mar, 2026 08:32 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 मार्च 2026 को ‘पेमेंट्स विजन 2028’ डॉक्यूमेंट जारी किया है। इसमें पारंपरिक कागजी चेक की जगह इलेक्ट्रॉनिक चेक यानी E-Check शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को और आसान, तेज और सुरक्षित बनाना है।
नेशनल डेस्क : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 मार्च 2026 को ‘पेमेंट्स विजन 2028’ डॉक्यूमेंट जारी किया है। इसमें पारंपरिक कागजी चेक की जगह इलेक्ट्रॉनिक चेक यानी E-Check शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को और आसान, तेज और सुरक्षित बनाना है।
कागज और डिजिटल का मिलेगा फायदा
RBI का कहना है कि वह E-Check की संभावनाओं पर काम करेगा, जिससे कागजी चेक की विश्वसनीयता और डिजिटल पेमेंट की स्पीड दोनों का फायदा मिल सके। इससे नए बिजनेस और पेमेंट के तरीकों को भी बढ़ावा मिलेगा और लेनदेन पहले से ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा।
धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की तैयारी
RBI डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए भी बड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। प्रस्ताव के तहत यूजर्स को यह सुविधा मिल सकती है कि वे UPI, नेट बैंकिंग जैसे पेमेंट मोड को ऑन या ऑफ कर सकें, जैसे अभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड में होता है। इससे यूजर्स का अपने पैसे पर कंट्रोल बढ़ेगा और सुरक्षा भी मजबूत होगी।
बैंकों की भी होगी साझा जिम्मेदारी
नई योजना के तहत अगर कोई डिजिटल फ्रॉड होता है, तो सिर्फ ग्राहक का बैंक ही नहीं बल्कि पैसे पाने वाला बैंक भी जिम्मेदार होगा। यानी अब धोखाधड़ी के मामलों में जिम्मेदारी साझा की जाएगी, जिससे सिस्टम ज्यादा जवाबदेह बनेगा।
अन्य बड़े बदलावों की तैयारी
RBI ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल सेवाओं को भी अपने रेगुलेशन में शामिल करने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा AePS, TReDS जैसे सिस्टम को और बेहतर बनाने और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के बीच ट्रांजैक्शन को आसान बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।