फिर IMF के दरवाजे पर पाकिस्तान… 1.2 अरब डॉलर की मंजूरी, कब तक चलेगा उधार का सहारा?

Edited By Updated: 29 Mar, 2026 02:13 AM

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पाकिस्तान एक बार फिर आर्थिक मदद के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास पहुंचा है और इस बार उसे 1.2 अरब डॉलर की राशि के लिए मंजूरी मिल गई है। बार-बार विदेशी मदद पर निर्भरता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक पाकिस्तान इसी तरह...

इंटरनेशनल डेस्कः पाकिस्तान एक बार फिर आर्थिक मदद के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास पहुंचा है और इस बार उसे 1.2 अरब डॉलर की राशि के लिए मंजूरी मिल गई है। बार-बार विदेशी मदद पर निर्भरता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक पाकिस्तान इसी तरह कर्ज और सहायता के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था चलाता रहेगा।

इस बार कैसे मिली 1.2 अरब डॉलर की मदद?

पाकिस्तान ने IMF के साथ दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत कुल 1.2 अरब डॉलर के लिए प्रारंभिक समझौता किया है। IMF ने शनिवार को जानकारी दी कि विस्तारित कोष सुविधा (EFF) की तीसरी समीक्षा पूरी हो गई। रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की दूसरी समीक्षा भी सफलतापूर्वक पूरी हुई।

IMF का प्रतिनिधिमंडल 25 फरवरी से 2 मार्च तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत में शामिल रहा था। उस समय समझौता नहीं हो पाया था, लेकिन बाद में ऑनलाइन बातचीत जारी रही और अंततः सहमति बन गई।

पाकिस्तान को कितनी राशि मिलेगी?

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 37 महीने की EFF व्यवस्था और 28 महीने की RSF व्यवस्था दोनों की समीक्षा पर सहमति बन गई है।

IMF मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा के अनुसार, बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद EFF के तहत करीब 1 अरब डॉलर, RSF के तहत करीब 210 मिलियन डॉलर (21 करोड़ डॉलर) पाकिस्तान को मिलेंगे।

पहले से चल रहा है बड़ा IMF कार्यक्रम

पाकिस्तान वर्ष 2024 में IMF के 7 अरब डॉलर के विस्तारित कोष सुविधा (EFF) कार्यक्रम में शामिल हुआ था।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, बाजार में विश्वास बहाल करना, राजकोषीय सुधार जारी रखना और ऊर्जा क्षेत्र की समस्याओं को कम करना है।

जलवायु और विकास के लिए अलग फंडिंग

पिछले साल पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए RSF के तहत 1.4 अरब डॉलर की सुविधा भी मिली थी। इसका मकसद आपदा प्रबंधन मजबूत करना, जल उपयोग दक्षता बढ़ाना और ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा देना है।

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