Edited By Sahil Kumar,Updated: 10 Feb, 2026 08:30 PM

प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी से पीएफ कटता है, लेकिन ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर अब भी भ्रम बना हुआ है. पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की सेवा और 58 साल की उम्र जरूरी है. नियोक्ता के योगदान का 8.33 फीसदी पेंशन फंड में...
नेशनल डेस्कः प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी स्लिप में हर महीने पीएफ कटौती दिखाई देती है, लेकिन पेंशन से जुड़ा हिस्सा अक्सर नजरों से ओझल रहता है. ईपीएफ पासबुक में जहां पीएफ का बैलेंस और ब्याज साफ दिखता है, वहीं कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का विवरण कई बार समझ से बाहर होता है. यही वजह है कि रिटायरमेंट के समय पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा सवाल खड़े होते हैं. हाल ही में वेतन सीमा और पेंशन नियमों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह जानना जरूरी हो गया है कि आखिर ईपीएफओ की पेंशन योजना काम कैसे करती है और इसका लाभ किन शर्तों पर मिलता है.
दो जरूरी शर्तें
ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना के तहत मासिक पेंशन का लाभ पाने के लिए दो जरूरी शर्तें तय की गई हैं. पहली शर्त है कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करना. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल नौकरी के साल गिने नहीं जाते, बल्कि पीएफ ट्रांसफर भी जरूरी होता है. अगर किसी कर्मचारी ने नौकरी बदलते समय पीएफ की रकम निकाल ली, तो वह अवधि पेंशन सेवा में नहीं जोड़ी जाती.
दूसरी अहम शर्त उम्र से जुड़ी है. पूर्ण पेंशन के लिए कर्मचारी की आयु 58 वर्ष होनी चाहिए. यानी 10 साल की निरंतर पेंशन सेवा और 58 साल की उम्र पूरी होने पर ही कर्मचारी आजीवन मासिक पेंशन का हकदार बनता है.
सैलरी से पेंशन फंड में कितना जाता है पैसा
अधिकांश कर्मचारियों को यह लगता है कि उनकी पूरी पीएफ कटौती उनके खाते में जमा होती है, जबकि हकीकत थोड़ी अलग है. कर्मचारी की सैलरी से कटने वाला हिस्सा पूरी तरह ईपीएफ में जाता है, लेकिन नियोक्ता द्वारा जमा किए गए योगदान का 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में भेज दिया जाता है. यह योगदान सरकार द्वारा तय वेतन सीमा के आधार पर ही होता है, न कि वास्तविक सैलरी पर. इसी कारण अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों की पेंशन भी एक तय सीमा से आगे नहीं बढ़ पाती. यह रकम व्यक्तिगत खाते में नहीं, बल्कि पेंशन फंड में जमा होती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद मासिक भुगतान किया जाता है.
50 की उम्र में पेंशन लेने से क्यों घट जाती है रकम
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद पेंशन लेना शुरू कर सकता है, लेकिन इसे अर्ली पेंशन माना जाता है. अगर कोई कर्मचारी 58 साल की उम्र से पहले पेंशन शुरू करता है, तो हर साल के हिसाब से पेंशन राशि में कटौती की जाती है. यह कटौती स्थायी होती है और जीवनभर कम पेंशन मिलती है. वहीं, अगर कर्मचारी 58 साल के बाद भी पेंशन न लेकर 60 साल तक इंतजार करता है, तो उसे बढ़ी हुई पेंशन का लाभ मिल सकता है.
एकमुश्त निकासी का विकल्प
कई कर्मचारियों को यह चिंता रहती है कि अगर उनकी नौकरी 10 साल से पहले छूट गई तो पेंशन का पैसा खत्म हो जाएगा. हालांकि ऐसा नहीं है. अगर किसी कर्मचारी की कुल सेवा अवधि 10 वर्ष से कम है, तो वह मासिक पेंशन का पात्र नहीं बनता, लेकिन उसकी जमा रकम सुरक्षित रहती है. नौकरी छोड़ने की स्थिति में कर्मचारी एकमुश्त निकासी का विकल्प चुन सकता है. इसके लिए ईपीएफओ एक तय सर्विस टेबल का इस्तेमाल करता है, जिसमें नौकरी के वर्षों के आधार पर एक फैक्टर तय कर वेतन से गुणा करके राशि का भुगतान किया जाता है.