Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Jan, 2026 02:06 PM

साल 2025 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए न तो पूरी तरह अच्छा रहा और न ही पूरी तरह खराब, लेकिन साल के आखिरी महीनों ने बाजार की चिंता जरूर बढ़ा दी है। देश के बड़े शहरों में बिना बिके मकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर दबाव साफ...
नेशनल डेस्क: साल 2025 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए न तो पूरी तरह अच्छा रहा और न ही पूरी तरह खराब, लेकिन साल के आखिरी महीनों ने बाजार की चिंता जरूर बढ़ा दी है। देश के बड़े शहरों में बिना बिके मकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर दबाव साफ नजर आने लगा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के टॉप 10 शहरों में करीब 7 लाख हाउसिंग यूनिट्स अनसोल्ड पड़ी हैं। यह स्थिति बताती है कि डिमांड और सप्लाई के बीच बड़ा गैप बन गया है, जिसका असर आने वाले समय में घर की कीमतों पर पड़ सकता है।
तैयार फ्लैट्स बहुत, खरीदार नदारद
रिपोर्ट में यह आंकड़े इसलिए भी चौंकाने वाले हैं क्योंकि बिल्डर्स के पास बड़ी संख्या में फ्लैट्स या तो बनकर तैयार हैं या फिर निर्माण के अंतिम चरण में हैं, लेकिन बाजार में खरीदारों की कमी साफ दिख रही है। बढ़ती कीमतें, आर्थिक अनिश्चितता और जॉब मार्केट की सुस्ती ने लोगों को घर खरीदने से पीछे हटने पर मजबूर किया है।
2025 में घरों की बिक्री 14% घटी
रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ा झटका घर की बिक्री में 14 प्रतिशत की गिरावट से लगा है।
रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे कई कारण रहे:
IT सेक्टर में छंटनी
-वैश्विक तनाव और आर्थिक दबाव
-प्रॉपर्टी के लगातार बढ़ते दाम..
इन सभी वजहों ने मिलकर खरीदारों का भरोसा कमजोर किया है।
बिल्डर्स पर बढ़ा दबाव, 2026 में कीमत घटाने की आशंका
बिक्री घटने और अनसोल्ड इन्वेंट्री बढ़ने से अब डेवलपर्स पर भारी दबाव बन रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2026 में बिल्डर्स को कीमतों में कटौती करनी पड़ेगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन शहरों में इन्वेंट्री ज्यादा है, वहां रेट स्थिर रहने या नरमी आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बेंगलुरु सबसे ज्यादा प्रभावित
शहरों की बात करें तो: बेंगलुरु में हालात सबसे खराब हैं, जहां अनसोल्ड इन्वेंट्री में 23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हैदराबाद और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) ने थोड़ी राहत दी है। यहां सीमित सप्लाई के चलते अनसोल्ड स्टॉक में क्रमशः 2% और 1% की गिरावट देखी गई। हालांकि कुल मिलाकर ज्यादातर बड़े शहरों में इन्वेंट्री का बोझ बढ़ा ही है।
कम बिक्री के बावजूद 6 लाख करोड़ पार कर गई सेल्स वैल्यू
दिलचस्प बात यह है कि घरों की बिक्री कम होने के बावजूद रियल एस्टेट की कुल सेल्स वैल्यू 6% बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई।
इसका सबसे बड़ा कारण है प्रीमियमाइजेशन।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में लॉन्च हुए नए प्रोजेक्ट्स में:
21% घरों की कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक रही
इस वजह से मिडिल क्लास खरीदार बाजार से दूर होता गया और किफायती घरों की इन्वेंट्री बढ़ती चली गई।
2026 में बाजार किस पर निर्भर करेगा?
एनारॉक के चेयरमैन के अनुसार, आने वाले साल में रियल एस्टेट की दिशा तय होगी:
-RBI की ब्याज दरों में संभावित कटौती
-डेवलपर्स द्वारा कीमतों को संतुलित रखने की रणनीति
-खरीदारों का भरोसा लौटाने की कोशिश