Edited By Parveen Kumar,Updated: 04 Jun, 2025 07:06 PM

भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती और सरकार की स्थिर नीतियों का असर अब दिखने लगा है। मई 2024 में देश में नई कंपनियों और LLP (सीमित देयता भागीदारी) के पंजीकरण में बड़ी तेजी आई है।
नेशनल डेस्क: भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती और सरकार की स्थिर नीतियों का असर अब दिखने लगा है। मई 2024 में देश में नई कंपनियों और LLP (सीमित देयता भागीदारी) के पंजीकरण में बड़ी तेजी आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई में 20,720 नई कंपनियां रजिस्टर की गईं, जबकि पिछले साल इसी महीने में ये संख्या 16,081 थी। यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनियों के पंजीकरण में 29% की बढ़ोतरी हुई है।
इसी तरह, LLP पंजीकरण में भी 37% की वृद्धि दर्ज की गई। मई में 7,487 LLP रजिस्टर हुईं, जबकि पिछले साल मई में यह संख्या 5,464 थी। यह लगातार पांचवां महीना है जब भारत में नई कंपनियों का पंजीकरण बढ़ रहा है।
GDP के दम पर दिख रहा है असर
- 2024-25 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4% रही है। पूरे वित्तीय वर्ष के लिए यह ग्रोथ 6.5% रही, जो कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से संभव हुआ है।
- अंतरराष्ट्रीय संगठन IMF ने भी माना है कि भारत ही एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसकी 2025-26 में 6% से ज़्यादा की विकास दर रहने की संभावना है।
- जबकि अमेरिका और अन्य देशों में टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से आर्थिक मंदी की आशंका है, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है।
OECD की रिपोर्ट भी भारत के पक्ष में
- OECD (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में 6.3% और 2026 में 6.4% की दर से बढ़ सकती है।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मजबूत घरेलू मांग, सेवा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती, और बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश भारत की तेज़ विकास दर के पीछे की बड़ी वजहें हैं।
निवेशकों का भरोसा और RBI की भूमिका
- विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च तिमाही में 7.4% की मजबूत GDP वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत की इकोनॉमी फिर रफ्तार पकड़ रही है। इससे न सिर्फ कॉर्पोरेट कमाई बढ़ सकती है, बल्कि विदेशी निवेशक (FII) भी भारत में निवेश जारी रख सकते हैं।
- सभी की नजर इस शुक्रवार को RBI की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले पर टिकी है। अगर नीतिगत दरों में कटौती की जाती है, तो बाजार को मध्यम अवधि में और सहारा मिल सकता है।