Silver Prices Increased: तीन गुणा बढ़ गए चांदी के दाम... अब इस फैसले से बढ़ेगी चिंता

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 07:09 PM

silver prices have increased threefold

देश में साल 2025 के दौरान चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में जबरदस्त उछाल, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने चांदी को सिर्फ...

नेशनल डेस्क: देश में साल 2025 के दौरान चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में जबरदस्त उछाल, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने चांदी को सिर्फ कीमती धातु नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संसाधन बना दिया है।

भारत इस समय रिफाइंड सिल्वर का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है। साल 2025 में भारत ने करीब 9.2 अरब डॉलर मूल्य की चांदी का आयात किया। हैरानी की बात यह है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, भारत का चांदी आयात पिछले साल की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

कीमतों में ऐतिहासिक उछाल

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में चांदी की कीमत 80,000 से 85,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी। वहीं जनवरी 2026 तक यह बढ़कर लगभग 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। GTRI का कहना है कि इस तेजी के पीछे केवल वैश्विक तनाव या वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले जैसे घटनाक्रम ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मांग के स्वरूप में आया बड़ा बदलाव भी एक अहम वजह है।

औद्योगिक जरूरतों ने बदली चांदी की भूमिका

आज दुनिया की 50 प्रतिशत से अधिक चांदी की खपत औद्योगिक क्षेत्रों में हो रही है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), रक्षा और हथियार प्रणालियां तथा मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल सौर ऊर्जा सेक्टर में ही वैश्विक चांदी की मांग का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा खप रहा है, जो इसके बढ़ते औद्योगिक महत्व को साफ दिखाता है।

मांग बढ़ी, आपूर्ति पीछे रह गई

साल 2000 के बाद से रिफाइंड सिल्वर की वैश्विक मांग करीब आठ गुना बढ़ चुकी है। यह संकेत है कि चांदी अब पारंपरिक निवेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था का एक जरूरी इनपुट बन चुकी है। इसके उलट, आपूर्ति इस तेजी के साथ नहीं बढ़ पाई है। इस क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ बनी हुई है—चीन दुनिया का सबसे बड़ा चांदी निर्यातक है, जबकि भारत सबसे बड़ा आयातक।

चीन के फैसले से बढ़ी चिंता

वैश्विक बाजार में चिंता उस समय और बढ़ गई, जब चीन ने चांदी के निर्यात के लिए लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया। यह नियम 1 जनवरी से लागू हो चुका है, जिसके तहत हर एक्सपोर्ट शिपमेंट के लिए अब चीनी सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक चांदी आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है और आने वाले समय में कीमतों में और ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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