खाना महंगा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई, रेलवे ने तय की वेज मील की असली कीमत, शेयर किया पूरा मेन्यू

Edited By Updated: 04 Jul, 2025 07:09 PM

strict action against those selling food at higher prices in railways

भारत में रोजाना करोड़ों लोग ट्रेन के जरिए सफर करते हैं, जिनमें से कई लोग लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। लंबे सफर के दौरान खाना बेहद जरूरी होता है। जो यात्री घर से खाना लेकर नहीं आते, वे अक्सर स्टेशन पर मिलने वाले खाने या ट्रेन की पैंट्री पर निर्भर...

National Desk : भारत में रोजाना करोड़ों लोग ट्रेन के जरिए सफर करते हैं, जिनमें से कई लोग लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। लंबे सफर के दौरान खाना बेहद जरूरी होता है। जो यात्री घर से खाना लेकर नहीं आते, वे अक्सर स्टेशन पर मिलने वाले खाने या ट्रेन की पैंट्री पर निर्भर रहते हैं। अगर आप भी ऐसी यात्रा करते हैं तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। हाल ही में रेल मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर वेज मील (स्टैंडर्ड कैसरोल) की कीमत और उसका पूरा मेन्यू साझा किया है।

तय कीमत से ज्यादा दाम पर खाना बेचते हैं कुछ कर्मचारी
अधिकांश लोग घर से तैयार खाना लेकर सफर करते हैं, लेकिन कई यात्री ऐसे भी होते हैं जो स्टेशन या ट्रेन में ही खाना खरीदते हैं। इन दिनों यात्रियों की शिकायतें बढ़ रही हैं कि रेलवे द्वारा तय कीमत से अधिक दाम पर खाना बेचा जा रहा है। साथ ही, कई यात्रियों को रेलवे द्वारा निर्धारित कीमत की भी जानकारी नहीं होती।

ट्रेन में वेज मील की कीमत है 80 रुपये
रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर बताया है कि स्टेशन पर वेज मील की कीमत 70 रुपये है, जबकि ट्रेन में इसका मूल्य 80 रुपये है। मेन्यू में प्लेन चावल (150 ग्राम), गाढ़ी दाल या सांभर (150 ग्राम), दही (80 ग्राम), 2 पराठे या 4 रोटियां (100 ग्राम), सब्जी (100 ग्राम) और अचार का पैकेट (12 ग्राम) शामिल होता है। हालांकि, रेलवे स्टेशन और ट्रेन में इस मेन्यू वाले वेज मील को तय कीमत से अधिक दाम पर बेचा जाना आम समस्या है।

कर्मचारी मनमानी करें तो शिकायत जरूर करें
अगर आपको ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर वेज मील की कीमत अधिक बताई जाए या मेन्यू में दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा कम की जाए, तो आप कर्मचारी को रेलवे मंत्रालय के आधिकारिक ट्वीट की जानकारी दिखा सकते हैं। यदि फिर भी कर्मचारी गलती मानने से इंकार करें, तो आप रेल हेल्पलाइन नंबर 139, रेलवे की आधिकारिक ऐप रेलवन या एक्स (ट्विटर) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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