Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Jan, 2026 12:55 PM

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में रहने वाली छात्रा समृद्धि को रेलवे की ट्रेन लेट होने की वजह से 9.10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। मामला खास इसलिए है क्योंकि ट्रेन की देरी के कारण समृद्धि एक महत्वपूर्ण एंट्रेंस परीक्षा देने से चूक गई थी। समृद्धि ने यह...
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में रहने वाली छात्रा समृद्धि को रेलवे की ट्रेन लेट होने की वजह से 9.10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। मामला खास इसलिए है क्योंकि ट्रेन की देरी के कारण समृद्धि एक महत्वपूर्ण एंट्रेंस परीक्षा देने से चूक गई थी। समृद्धि ने यह मामला 2018 में जिला कंज्यूमर फोरम में उठाया था। उस समय वह इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन से लखनऊ जा रही थी, जहां उसे BSc बायोटेक्नोलॉजी की प्रवेश परीक्षा देनी थी। ट्रेन दो घंटे से अधिक लेट हुई, जिससे वह परीक्षा केंद्र समय पर नहीं पहुँच सकी।
20 लाख रुपये की थी मांग
समृद्धि ने परीक्षा की तैयारी में पूरे एक साल का समय लगाया था। उसका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जय नारायण पीजी कॉलेज में था। उसने बस्ती से ट्रेन का टिकट लिया था, जो सुबह 11 बजे लखनऊ पहुँचने वाली थी। लेकिन ट्रेन ढाई घंटे देरी से पहुँची और वह परीक्षा देने से चूक गई। इसके बाद उसने अपने वकील के माध्यम से रेलवे से 20 लाख रुपये का मुआवजा मांगा। रेल मंत्रालय, जनरल मैनेजर और स्टेशन सुपरिटेंडेंट को नोटिस भेजे गए, लेकिन रेलवे की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
रेलवे को जिम्मेदार माना गया
सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को समय पर सेवा देने में असफल मानते हुए समृद्धि के पक्ष में फैसला सुनाया। रेलवे ने ट्रेन में देरी स्वीकार की, लेकिन देरी की कोई ठोस वजह पेश नहीं कर सका। आयोग ने आदेश दिया कि रेलवे 45 दिनों के अंदर समृद्धि को 9.10 लाख रुपये का मुआवजा दे। तय समय में भुगतान न होने पर इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी लगेगा। समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि यह घटना 7 मई 2018 की है। उस दिन समृद्धि लखनऊ जा रही थी ताकि वह अपनी एंट्रेंस परीक्षा दे सके, लेकिन ट्रेन की देरी के कारण परीक्षा केंद्र समय पर नहीं पहुँच सकी।
यात्रियों के अधिकार और रेलवे की जिम्मेदारी पर सवाल
इस मामले ने देशभर में ट्रेन की देरी और यात्रियों के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। ट्रेन लेट होना देश में लाखों यात्रियों के लिए आम समस्या है और समृद्धि का यह केस इसका एक बड़ा उदाहरण बन गया।