Edited By Radhika,Updated: 07 Jan, 2026 06:58 PM

देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पिछले 11 सालों से जिस पीएफ (EPF) सैलरी लिमिट को बढ़ाने का इंतजार किया जा रहा था, अब उस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को साफ निर्देश...
नेशनल डेस्क: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पिछले 11 सालों से जिस पीएफ (EPF) सैलरी लिमिट को बढ़ाने का इंतजार किया जा रहा था, अब उस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को साफ निर्देश दिया है कि 15,000 रुपये की पुरानी सीमा पर विचार करें और अगले 4 महीनों में इस पर अंतिम फैसला लें।
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब बीते एक दशक में महंगाई और न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) में भारी उछाल आया है, तो EPFO की सैलरी सीमा 2014 के स्तर पर ही क्यों टिकी हुई है?
2014 से नहीं बदला नियम
पिछली बार EPFO की 'वेज सीलिंग' (सैलरी लिमिट) को साल 2014 में ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। तब से अब तक स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। कई राज्यों में तो अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ही ₹15,000 से ऊपर है। ऐसे में जो कर्मचारी न्यूनतम वेतन पा रहे हैं, वे भी पीएफ के अनिवार्य दायरे से बाहर हो रहे हैं, जो उनकी सामाजिक सुरक्षा (पेंशन और बीमा) के लिए बड़ा खतरा है।
अब क्या होगा बदलाव?
सूत्रों और ईपीएफओ की सब-कमेटी की सिफारिशों के अनुसार सरकार इस सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 या ₹25,000 कर सकती है। अभी पेंशन फंड (EPS) में योगदान ₹15,000 की लिमिट पर आधारित है (अधिकतम ₹1,250 प्रति माह)। अगर लिमिट ₹25,000 होती है, तो मासिक योगदान बढ़कर ₹2,083 हो जाएगा। इससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली पेंशन की राशि में भारी इजाफा होगा। इससे लाखों नए कर्मचारी ईपीएफओ के सुरक्षा चक्र (Social Security) के दायरे में आ जाएंगे।