Liquor Prices Hike: उत्तराखंड में शराब के शौकीनों को झटका: 1 अप्रैल से शराब महंगी, 5–10% तक कीमतों में इजाफा

Edited By Updated: 04 Feb, 2026 12:01 PM

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उत्तराखंड में शराब के शौकीनों की जेब पर आने वाले समय में और बोझ बढ़ने वाला है। राज्य की वर्तमान आबकारी नीति के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से मदिरा के दामों में इजाफा होना तय है।

नेशनल डेस्क: उत्तराखंड में शराब के शौकीनों की जेब पर आने वाले समय में और बोझ बढ़ने वाला है। राज्य की वर्तमान आबकारी नीति के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से मदिरा के दामों में इजाफा होना तय है।

 नए वित्तीय वर्ष से लागू होंगी बढ़ी हुई दरें
देहरादून से आ रही खबरों के मुताबिक, उत्तराखंड में 1 अप्रैल, 2026 से शराब की कीमतें 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने तीन साल के लिए जो आबकारी नीति तैयार की है, उसमें हर साल कीमतों को थोड़ा बढ़ाने का नियम रखा गया है। इसी आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब के नए रेट तय किए जा रहे हैं।

राजस्व बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक योजना
प्रदेश सरकार के लिए आबकारी विभाग कमाई का एक बड़ा जरिया है और इस साल के लिए 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। नई नीति के तहत दुकानों का आवंटन तीन साल के लिए किया गया है, जिससे व्यापारियों को बार-बार की कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिली है। व्यवस्था के अनुसार, हर साल अंग्रेजी शराब की दुकानों के राजस्व में 4 प्रतिशत और देसी शराब के लिए 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों की बोतलों की कीमत पर पड़ेगा।

विभाग का सख्त रुख और कीमतों की निगरानी
एक तरफ जहां भविष्य में कीमतें बढ़ने वाली हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान में भी कई जगहों पर शराब महंगी बिकने की खबरें हैं। पिछले दिनों टैक्स को लेकर हुए कानूनी विवाद के बाद सरकार ने बढ़ी हुई दरें वापस लेने का आदेश दिया था, लेकिन शिकायतें आ रही हैं कि दुकानदार अब भी पुराने महंगे रेट पर ही बिक्री कर रहे हैं। इस मुद्दे पर आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया है कि नीति के तहत वार्षिक बढ़ोत्तरी तो होगी, लेकिन यदि कोई दुकानदार तय रेट से ज्यादा वसूली करता पाया गया, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राजस्व और पारदर्शिता पर फोकस
सरकार का मानना है कि इस तीन साल वाली नीति से सरकारी खजाने में आने वाले पैसे में स्थिरता बनी रहेगी। दुकानों के संचालन की निगरानी पहले से ज्यादा बेहतर हुई है और प्रशासन को उम्मीद है कि इस व्यवस्थित बढ़ोत्तरी से अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी और सरकारी आय में भी निरंतरता बनी रहेगी।


 

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