Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Feb, 2026 03:38 PM

आज के दौर में साइबर अपराधी ऐसे शातिर तरीके अपना रहे हैं कि शिक्षित लोग भी उनके झांसे में आ जाते हैं। दिल्ली के एक व्यक्ति के साथ हुई हालिया घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है, जहां एक साधारण से दिखने वाले व्हाट्सएप मैसेज ने उनकी जमापूंजी पर डाका डाल दिया।
नेशनल डेस्क: आज के दौर में साइबर अपराधी ऐसे शातिर तरीके अपना रहे हैं कि शिक्षित लोग भी उनके झांसे में आ जाते हैं। दिल्ली के एक व्यक्ति के साथ हुई हालिया घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है, जहां एक साधारण से दिखने वाले व्हाट्सएप मैसेज ने उनकी जमापूंजी पर डाका डाल दिया।
ट्रैफिक चालान के नाम पर आया फर्जी संदेश
दिल्ली के रहने वाले एक शख्स के WhatsApp पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। इस मैसेज में दावा किया गया था कि उनका 1000 रुपये का ट्रैफिक चालान बकाया है। ठगों ने इस संदेश को इतना असली रूप दिया था कि इसमें सरकारी ऐप 'mParivahan' और परिवहन विभाग के नाम का इस्तेमाल किया गया था। मैसेज की भाषा और लिखने का अंदाज बिल्कुल वैसा ही था जैसा सरकारी अलर्ट में होता है, जिससे पीड़ित को जरा भी शक नहीं हुआ।
एक क्लिक और मोबाइल में पहुंच गया वायरस
मैसेज के साथ एक लिंक दिया गया था, जिस पर क्लिक करके चालान भरने को कहा गया। जैसे ही उस व्यक्ति ने लिंक दबाया, एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड हो गई। ऐप इंस्टॉल होने के बाद उसमें चालान की कोई जानकारी नहीं दिखी, लेकिन असली खेल पर्दे के पीछे शुरू हो चुका था। वह ऐप दरअसल एक वायरस (मालवेयर) था, जिसने पीड़ित के फोन का पूरा नियंत्रण और Banking जानकारी चोरी-छिपे ठगों तक पहुंचा दी।
मिनटों में खाली हुआ बैंक खाता
दोपहर के समय अचानक पीड़ित के पास ईमेल अलर्ट आने लगे। सबसे पहले उनके अमेज़न E-Wallet का पासवर्ड बदला गया और फिर उनकी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी भी बदल दी गई। इसके तुरंत बाद उनके क्रेडिट कार्ड से बड़े लेन-देन (ट्रांजैक्शन) के मैसेज आने शुरू हो गए। बिना किसी अनुमति या ओटीपी के उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके कुल पांच बार में करीब 4.05 लाख रुपये निकाल लिए गए।
रकम वापस पाना क्यों है मुश्किल?
ठगों ने चोरी किए गए पैसों का इस्तेमाल सीधे कैश निकालने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से 'ई-गिफ्ट कार्ड' खरीदने के लिए किया। ये गिफ्ट कार्ड डिजिटल रूप से अपराधी की Email-ID पर भेजे गए। इस तरीके से किए गए फ्रॉड में पैसे को ट्रैक करना और वापस पाना बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि गिफ्ट कार्ड तुरंत इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस घटना के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच कर रही है।