Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Feb, 2026 05:17 PM

देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर रही है। नए साल के शुरुआती महज 27 दिनों के भीतर ही शहर से 807 व्यक्ति रहस्यमयी ढंग से गायब हो गए। सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह भयावह तस्वीर सामने आती है कि...
नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर रही है। नए साल के शुरुआती महज 27 दिनों के भीतर ही शहर से 807 व्यक्ति रहस्यमयी ढंग से गायब हो गए। सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह भयावह तस्वीर सामने आती है कि दिल्ली में हर दिन औसतन 27 लोग अपने घरों से लापता हो रहे हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां सक्रियता दिखाते हुए प्रतिदिन करीब 9 लोगों को खोजने में सफल भी रही हैं, लेकिन बाकी लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। मौजूदा स्थिति यह है कि जनवरी के इन शुरुआती दिनों में लापता हुए लोगों में से 538 लोग अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
लापता होने वालों की सूची में सबसे ज्यादा तादाद महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों की है। आंकड़े बताते हैं कि नाबालिगों के मामले में 12 से 18 साल की किशोरियों की संख्या बहुत अधिक है, जो इस समस्या को और भी संजीदा बना देती है। जानकारों का मानना है कि ये केवल सामान्य गुमशुदगी के मामले नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे मानव तस्करी या अपहरण जैसे संगठित अपराधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साल के पहले 27 दिनों में ही 191 नाबालिग गायब हुए, जिनमें से 137 बच्चों का अब तक कुछ पता नहीं चला है।
वयस्कों की गुमशुदगी का बढ़ता ग्राफ
केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़ी उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में गायब हो रहे हैं। जनवरी के शुरुआती दिनों में 616 वयस्क लापता दर्ज किए गए। पुलिस की तफ्तीश में इनमें से 181 लोगों (जिनमें पुरुष और महिलाएँ लगभग बराबर हैं) को तो ढूंढ लिया गया, लेकिन 435 वयस्क अभी भी लापता व्यक्तियों की श्रेणी में बने हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि समाज का हर वर्ग इस समस्या की जद में है।
बीते दशक के डरावने आंकड़े
अगर हम पिछले 11 वर्षों के रिकॉर्ड पर नज़र डालें, तो स्थिति और भी चिंताजनक नज़र आती है। दिल्ली पुलिस के 'जिपनेट' डेटाबेस के अनुसार, 2016 से लेकर 2026 की शुरुआत तक कुल 60,694 बच्चे लापता हुए। हालांकि प्रशासन ने इनमें से 53,763 बच्चों को सुरक्षित तलाश लिया, लेकिन 6,931 बच्चे ऐसे हैं जिनका आज तक कोई अता-पता नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि गायब होने वाले कुल बच्चों में से लगभग 11 प्रतिशत बच्चे कभी वापस नहीं लौट पाते।
पिछले साल के अधूरे जख्म और वर्तमान चुनौतियां
साल 2025 में भी हालात कुछ जुदा नहीं थे। बीते वर्ष कुल 5,915 बच्चे लापता हुए थे, जिनमें से 1,491 बच्चों की तलाश अब भी जारी है। इसी तरह, बहुत छोटे बच्चों (8 साल तक की उम्र) की बात करें तो 2025 में गायब हुए 368 बच्चों में से 219 का सुराग अब तक नहीं मिला है। 2026 की शुरुआत में भी छोटे बच्चों के गायब होने का सिलसिला जारी है। हर बीतते साल के साथ संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यही है कि आखिर वे बच्चे कहाँ चले जाते हैं जिन्हें पुलिस की तमाम तकनीक और नेटवर्क के बावजूद नहीं ढूँढा जा पा रहा है।