खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में मिला-जुला रुख

Edited By Updated: 29 Mar, 2023 06:40 PM

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नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) सस्ते आयातित खाद्य तेलों से बाजार पटा होने के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बुधवार को खाद्य तेल कीमतों में कारोबार का मिला-जुला रुख रहा। किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने से एक ओर जहां सरसों तेल-तिलहन...

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) सस्ते आयातित खाद्य तेलों से बाजार पटा होने के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बुधवार को खाद्य तेल कीमतों में कारोबार का मिला-जुला रुख रहा। किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने से एक ओर जहां सरसों तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन कीमतों में सुधार आया, वहीं सूरजमुखी तेल के सस्ता होने से सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट आई। मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतें अपरिवर्तित रहीं।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि पिछले तीन माह में मार्च तक सूरजमुखी तेल का 8.68 लाख टन का आयात हो चुका है जो अगले लगभग छह महीने की मांग पूरा करने के लिए पर्याप्त है। आगे आयात और बढ़ेगा और सूरजमुखी तेल का दाम इतिहास में पहली बार सीपीओ, पामोलीन से कम हो गया है जिससे सोयाबीन की भी मांग प्रभावित हुई है। बंदरगाह पर सूरजमुखी तेल का थोक भाव लगभग 78 रुपये लीटर बैठता है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के हिसाब से देशी तेल-तिलहनों का भाव 125-135 रुपये लीटर बैठता है। ऐसी स्थिति में देशी तेल-तिलहनों का बाजार में खपना मुश्किल होता जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या देशी तिलहनों से प्राप्त होने वाले खल की है जिसके आयात में भी समस्या है क्योंकि इसकी विदेशों में कम उपलब्धता की वजह से आयात मांग का पूरा करना मुश्किल होगा। पिछले साल सरसों खल का भारी मात्रा में निर्यात हुआ था लेकिन इस बार देश को अपनी खपत के लिए सरसों खल की दिक्कत आ सकती है।

सूत्रों ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चार महीने (120 दिन) के लिए व्यापार गलियारा खोलने के कारण सूरजमुखी के भाव सीपीओ, पामोलीन तेल से भी सस्ते हो गये हैं। सूरजमुखी के भाव बेहद कम होने से सोयाबीन की मांग प्रभावित हुई है। इसी वजह से देश के सरसों और सूरजमुखी तेल भी एमएसपी से नीचे दाम पर बिक रहे हैं। तेल पेराई करने वाली मिलों को देशी तिलहनों की पेराई करने में 4-5 रुपये किलो का नुकसान है।

सूत्रों ने कहा कि वार्षिक लेखा जोखा बंदी का समय नजदीक होने के कारण फिलहाल तेल-तिलहन में कारोबार कुछ कम है। सरकार ने पहले कहा था कि समर्थन मूल्य से तिलहनों के भाव कम होने पर आयात को नियंत्रित करने की व्यवस्था की जायेगी। लेकिन सूरजमुखी और सरसों एमएसपी से नीचे बिक रहा है लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। आज बिनौला खल के भाव में तेजी रही।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,285-5,335 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,815-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,545-2,810 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,705-1,775 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,705-1,825 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,080 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,980 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,340 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,260-5,410 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,020-5,060 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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