Harish Rana News: हरीश राणा की हर सांस पर नज़र, भोजन के बाद अब पानी भी बंद, जानें कैसे जिंदगी छीन लेती है 'पैसिव यूथनेशिया'

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 02:39 PM

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गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए जिंदगी साल 2013 में ही एक ऐसे मोड़ पर ठहर गई थी, जहां से आगे सिर्फ खामोशी थी। एक दर्दनाक हादसे ने 18 साल के उस नौजवान को बिस्तर पर पत्थर बना दिया, जो आज 31 साल की उम्र में दुनिया से अंतिम विदा लेने की तैयारी कर रहा है।...

नेशनल डेस्क:  गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए जिंदगी साल 2013 में ही एक ऐसे मोड़ पर ठहर गई थी, जहां से आगे सिर्फ खामोशी थी। एक दर्दनाक हादसे ने 18 साल के उस नौजवान को बिस्तर पर पत्थर बना दिया, जो आज 31 साल की उम्र में दुनिया से अंतिम विदा लेने की तैयारी कर रहा है। यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि देश के न्यायिक और चिकित्सा इतिहास का वो भावुक पन्ना है, जहां माता-पिता खुद भारी मन से अपने कलेजे के टुकड़े के लिए मौत मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद अब दिल्ली के एम्स अस्पताल में हरीश को 'पैसिव यूथनेशिया' यानी इच्छामृत्यु देने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है।

अस्पताल के गलियारों में हलचल तो है, लेकिन वहां एक अजीब सी उदासी भी पसरी हुई है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम, जिसमें न्यूरोसर्जरी और मनोचिकित्सा के माहिर डॉक्टर शामिल हैं, इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है। आज का दिन हरीश की इस मुश्किल यात्रा में सबसे निर्णायक है, क्योंकि अब उसे जीवित रखने वाले कृत्रिम साधनों को एक-एक कर हटाया जा रहा है। डॉक्टरों ने तय किया है कि आज से हरीश को पानी देना भी बंद कर दिया जाएगा। जो भोजन अब तक नली के जरिए उसके पेट तक पहुंच रहा था, उस पर भी रोक लगा दी गई है। हालांकि, नली को शरीर से निकाला नहीं गया है, बस उस पर कैप लगा दी गई है ताकि संक्रमण न फैले।

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि यह हरीश को दर्द से मुक्ति दिलाने का एक शांत रास्ता है। उसे 'पैलियेटिव एनेस्थीसिया' (Palliative Anesthesia) दिया जा रहा है, ताकि जब उसका शरीर धीरे-धीरे साथ छोड़ना शुरू करे, तो उसे किसी भी तरह की बेचैनी या तकलीफ महसूस न हो। चिकित्सा जगत के जानकारों के मुताबिक, ऑक्सीजन और पोषण बंद होने के बाद शरीर को पूरी तरह शांत होने में लगभग तीन से चार हफ्ते का समय लग सकता है। घरवाले इस वक्त बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन उनकी आंखों में आंसू के साथ एक संतोष भी है कि शायद अब उनके लाडले को उस कैद से आजादी मिल जाएगी, जिसमें वह पिछले 13 सालों से बिना बोले और बिना हिले-डुले जी रहा था।

पैलिएटिव एनेस्थीसिया कैसे काम करती है?
पैलिएटिव एनेस्थीसिया का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के दर्द और अन्य लक्षणों को नियंत्रित करना होता है। यह कई तरीकों से काम करती है:

1. दर्द और लक्षणों का प्रबंधन
डॉक्टर दर्द निवारक दवाओं जैसे ओपिओइड्स (Opioids), स्टेरॉयड और एनेस्थेटिक एजेंट्स का इस्तेमाल करते हैं। ये दवाएं तंत्रिका तंत्र में जाने वाले दर्द के संकेतों को कम या ब्लॉक कर देती हैं, जिससे मरीज को राहत मिलती है।

2. सुन्नपन और आराम (Sedation)
जब दर्द या बेचैनी सामान्य दवाओं से कंट्रोल नहीं होती, तो मरीज को सेडेटिव दवाएं दी जाती हैं। इससे मरीज गहरी नींद या आरामदायक सुन्न अवस्था में चला जाता है और उसे दर्द महसूस नहीं होता।

3. दवा देने के तरीके
-पैलिएटिव एनेस्थीसिया अलग-अलग तरीकों से दी जा सकती है:
-इंजेक्शन के जरिए
-नसों में लगातार इन्फ्यूजन (Continuous Infusion)
-विशेष पंप के माध्यम से दवा की नियमित आपूर्ति
-इससे मरीज को लगातार और स्थिर राहत मिलती रहती है।

4. विशेषज्ञों की टीम की भूमिका
यह प्रक्रिया एक बहुविषयक टीम (Multidisciplinary Team) द्वारा की जाती है, जिसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, दर्द विशेषज्ञ, नर्स और मनोवैज्ञानिक शामिल होते हैं। सभी मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज तय करते हैं।

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