Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Jan, 2026 06:27 PM

जैसे-जैसे बजट 2026 की तारीख नज़दीक आ रही है, भारत के क्रिप्टो बाजार में नई उम्मीदें जन्म ले रही हैं। बीते कुछ वर्षों से कड़े टैक्स नियमों के बोझ तले दबा यह सेक्टर अब सरकार से राहत की आस लगाए बैठा है। 2022 के बजट में लागू किए गए सख्त नियमों के बाद...
बिजनेस डेस्कः जैसे-जैसे बजट 2026 की तारीख नज़दीक आ रही है, भारत के क्रिप्टो बाजार में नई उम्मीदें जन्म ले रही हैं। बीते कुछ वर्षों से कड़े टैक्स नियमों के बोझ तले दबा यह सेक्टर अब सरकार से राहत की आस लगाए बैठा है। 2022 के बजट में लागू किए गए सख्त नियमों के बाद घरेलू क्रिप्टो बाजार में गतिविधियां सुस्त पड़ गई थीं और बड़ी संख्या में निवेशकों ने विदेशी प्लेटफॉर्म्स का रुख कर लिया था।
अब क्रिप्टो इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ी सरकार के सामने कुछ अहम मांगें रख रहे हैं, जिनका मानना है कि अगर इन पर गौर किया गया, तो न सिर्फ बाजार में फिर से जान आएगी, बल्कि आम निवेशकों को भी राहत मिलेगी।
TDS घटाने की मांग
क्रिप्टो इंडस्ट्री की सबसे बड़ी मांग हर ट्रांजेक्शन पर लगने वाले 1% TDS को घटाने को लेकर है। इंडस्ट्री का कहना है कि यह नियम खासकर डे-ट्रेडर्स के लिए भारी पड़ता है, क्योंकि इससे उनकी ट्रेडिंग कैपिटल लगातार फंसी रहती है।
वज़ीरएक्स के संस्थापक निश्चल शेट्टी का सुझाव है कि TDS को घटाकर 0.01% किया जाए। इससे एक तरफ सरकार को ट्रांजेक्शन ट्रैक करने में मदद मिलेगी और दूसरी ओर घरेलू एक्सचेंजों पर कारोबार बढ़ेगा। वहीं, मुड्रेक्स के सीईओ एडुल पटेल का कहना है कि ऊंचे TDS के चलते भारतीय निवेशक विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं, जिससे देश को न तो बिजनेस मिल रहा है और न ही पूरा टैक्स रेवेन्यू।
लॉन्ग टर्म निवेश पर टैक्स में राहत
दूसरी बड़ी चिंता क्रिप्टो मुनाफे पर लगने वाला 30% फ्लैट टैक्स है। सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) को लॉटरी और सट्टेबाजी की श्रेणी में रखते हुए यह नियम लागू किया था।
इंडस्ट्री का मानना है कि यह व्यवस्था शेयर बाजार के निवेशकों के मुकाबले अनुचित है। शेयरों में लंबी अवधि के निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है, जबकि क्रिप्टो में निवेश की अवधि चाहे जितनी भी हो, मुनाफे पर 30% टैक्स देना पड़ता है। इंडस्ट्री चाहती है कि लॉन्ग टर्म क्रिप्टो निवेश को भी अलग टैक्स ट्रीटमेंट मिले।
नेट रेवेन्यू पर टैक्स की मांग
मौजूदा नियमों के तहत क्रिप्टो में हुए नुकसान को मुनाफे से सेट-ऑफ करने की अनुमति नहीं है। यानी एक कॉइन में घाटा और दूसरे में मुनाफा होने पर भी पूरे मुनाफे पर टैक्स देना पड़ता है।
क्रिप्टो एक्सपर्ट्स इसे एकतरफा टैक्स व्यवस्था बता रहे हैं। उनकी मांग है कि निवेशकों से नेट रेवेन्यू यानी शुद्ध मुनाफे पर टैक्स लिया जाए, जैसा शेयर बाजार और अन्य व्यवसायों में होता है। निश्चल शेट्टी का कहना है कि घाटे को समायोजित करने की अनुमति न देना एक असंतुलित नीति है, जिसे बजट 2026 में ठीक किया जाना चाहिए।