Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Oct, 2023 04:48 PM

भारतीय वाहन क्षेत्र में 2035 तक निर्यात की अगुवाई में एक लाख करोड़ डॉलर का उद्योग बनने की क्षमता है। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। आर्थर डी लिटिल की रिपोर्ट के अनुसार, वाहन उद्योग विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी में बढ़त के जरिए इस आकार को...
नई दिल्लीः भारतीय वाहन क्षेत्र में 2035 तक निर्यात की अगुवाई में एक लाख करोड़ डॉलर का उद्योग बनने की क्षमता है। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। आर्थर डी लिटिल की रिपोर्ट के अनुसार, वाहन उद्योग विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी में बढ़त के जरिए इस आकार को हासिल कर सकता है। आर्थर डी लिटिल के प्रबंधन भागीदार (भारत और दक्षिण एशिया) बार्निक चित्रन मैत्रा ने कहा कि भारत का वाहन उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अनुसार डिजायन, विकास और उत्पादन के मामले में वैश्विक केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि इसे पाने के लिए विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी वैश्विक विनिर्माण में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। मैत्रा ने कहा, “वाहन सॉफ्टवेयर और ईआरएंडडी (इंजीनियरिंग अनुसंधान और विकास) में भारत की ताकत जोनल आर्किटेक्चर और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) जैसे उभरते रुझानों के अनुरूप समाधान पेश करके बढ़ सकती है।”