Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Jan, 2026 01:14 PM

चार दिन की लगातार गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की थी लेकिन अमेरिका से आए एक बयान ने निवेशकों की धारणा बिगाड़ दी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री (कॉमर्स सेक्रेटरी) के बयान के बाद बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे...
बिजनेस डेस्कः चार दिन की लगातार गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की थी लेकिन अमेरिका से आए एक बयान ने निवेशकों की धारणा बिगाड़ दी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री (कॉमर्स सेक्रेटरी) के बयान के बाद बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए।
दोपहर 12:45 बजे बीएसई सेंसेक्स 624.58 अंक यानी 0.74% गिरकर 83,556.38 पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 653 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 50 भी 193.25 अंक यानी 0.75% टूटकर 25,683.60 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 2,200 अंक गिर चुका है। इससे पहले गुरुवार को बाजार में 780 अंकों की बड़ी गिरावट आई थी।
किन शेयरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
निफ्टी में आज के कारोबार के दौरान ईटरनल, एचसीएल टेक और एशियन पेंट्स में मजबूती देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर आईसीआईसीआई बैंक, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव बना रहा—
- निफ्टी मिडकैप 150: 0.33% गिरावट
- निफ्टी स्मॉलकैप 250: 0.79% गिरावट
सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा कमजोर रहे, जबकि निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई।
ट्रेड डील पर अमेरिकी मंत्री का बयान
इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक का बयान माना जा रहा है। एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इसलिए फाइनल नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। लुटनिक के मुताबिक, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत जरूरी थी, लेकिन भारतीय पक्ष इसको लेकर सहज नहीं था, जिससे डील आगे नहीं बढ़ पाई।
निवेशकों में बढ़ी अनिश्चितता
अमेरिका-भारत ट्रेड डील से जुड़ी इस टिप्पणी ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इस मुद्दे पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।