Chanakya Niti: प्यार नहीं, पछतावा मिलेगा अगर शादीशुदा जातक करेंगे ये गलतियां

Edited By Updated: 25 Apr, 2025 11:27 AM

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प्राचीन भारतीय विद्वान चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, न केवल राजनीति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में पारंगत थे, बल्कि उन्होंने मानव जीवन की व्यवहारिकता को भी बखूबी समझा

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Chanakya Niti: प्राचीन भारतीय विद्वान चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, न केवल राजनीति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में पारंगत थे, बल्कि उन्होंने मानव जीवन की व्यवहारिकता को भी बखूबी समझा और उस पर गहन विचार प्रस्तुत किए। चाणक्य नीति  नामक ग्रंथ में उन्होंने जीवन के हर पहलू पर विचार किया है चाहे वह राजनीति हो, धन-संपत्ति हो, या पारिवारिक जीवन। खासकर वैवाहिक जीवन के संबंध में चाणक्य ने कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। चाणक्य का मानना था कि शादी एक ऐसा बंधन है जिसमें प्रेम, समझदारी और विश्वास की बुनियाद होनी चाहिए। लेकिन अगर कुछ खास गलतियां कर दी जाएं, तो यह रिश्ता प्यार की बजाय पछतावे में बदल सकता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में, जिन्हें शादीशुदा जातकों को हर हाल में टालना चाहिए।

गुप्त बातों का सार्वजनिक करना
पति-पत्नी के रिश्ते में कई बातें ऐसी होती हैं जो सिर्फ उनके बीच ही रहनी चाहिए। अगर कोई पति या पत्नी अपने निजी जीवन की बातों को दोस्तों, सहकर्मियों या सोशल मीडिया पर साझा करने लगता है, तो यह रिश्ते की मर्यादा को भंग करता है। चाणक्य के अनुसार, विवाह का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है और जब गोपनीयता टूटती है, तो विश्वास भी डगमगाने लगता है। इसके परिणामस्वरूप रिश्ते में खटास आ सकती है और वह प्यार धीरे-धीरे पछतावे में बदल सकता है।

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माता-पिता या परिवार की बुराई करना
चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी के माता-पिता की निंदा करना अत्यंत निंदनीय है – विशेषकर जब वह निंदा पति-पत्नी के बीच हो। अगर कोई पति या पत्नी बार-बार अपने जीवनसाथी के परिवार की बुराई करता है, तो यह न केवल संबंधों को तोड़ता है, बल्कि मन में कटुता भी उत्पन्न करता है।
इसलिए विवाहित जीवन में एक-दूसरे के परिवार के प्रति सम्मान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

धन को लेकर लापरवाही
धन का सही प्रबंधन चाणक्य की नीति का मूल स्तंभ है। वे कहते हैं – धन का अपव्यय, बिना सोचे समझे खर्च, और साझेदारी में असंतुलन, गृहस्थ जीवन को नष्ट कर सकता है। अगर एक शादीशुदा व्यक्ति अपने खर्चों को लेकर लापरवाह होता है या परिवार की सहमति के बिना निर्णय लेता है, तो यह रिश्ते में तनाव का कारण बन सकता है।

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एक-दूसरे की उपेक्षा करना
चाणक्य नीति में यह बात विशेष रूप से कही गई है कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है, वह अपने ही जीवन को दुःख से भर देता है। अगर पति-पत्नी एक-दूसरे को समय नहीं देते, भावनाओं की कद्र नहीं करते और उनकी बातों को नजरअंदाज करते हैं, तो यह उपेक्षा धीरे-धीरे दिल की दूरी में बदल जाती है।

झूठ बोलना और छल करना
वैवाहिक जीवन की नींव सच और ईमानदारी पर टिकी होती है। अगर पति या पत्नी एक-दूसरे से झूठ बोलते हैं, तो वह रिश्ता खोखला हो जाता है। यह झूठ चाहे किसी व्यक्ति विशेष से मिलना हो, पैसे को लेकर बात हो या निजी फैसले – हर झूठ रिश्ते में दरारें ला सकता है। चाणक्य नीति के अनुसार, छल-कपट से दूर रहना ही जीवन में सुख और शांति का मार्ग है।

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